शुरू से टाइटलर के खिलाफ थीं नफीसा

उन्होंने कहा, "मैंने कांग्रेसी उम्मीदवारों की सूची में टाइटलर और सज्जन को शामिल करने पर विरोध जताया था। कांग्रेस नेतृत्व के साथ इस मसले पर मतभेद के कारण मुझे पार्टी से बाहर होना पड़ा। मैं ऐसे सांप्रदायिक नेताओं के खिलाफ रही हूं।" उन्होंने कहा कि उन्हें सच बोलने में डर नहीं लगता और जब इन दोनों नेताओं के खिलाफ आवाज उठाई थी तो भी डर नहीं लगा था।
सिखों के साथ बेहद बुरा हुआ
वह कहती हैं, "मैं सामाजिक कार्यकर्ता हूं। मुझे सच बोलने से कोई नहीं रोक सकता। मैं सिखों की पीड़ा समझ सकती हूं, क्योंकि मेरे पति और दामाद सिख हैं। सिखों के साथ जो कुछ भी हुआ वह बेहद बुरा था।"
नफीसा अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं। इससे पहले उन्होंने दक्षिणी कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के खिलाफ चुनावी जंग लड़ी थी। उन्हें उम्मीद है कि लखनऊ की जनता उन्हें संसद में भेजने का फैसला करेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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