कांग्रेस-भाजपा में तेज हुआ राजनीतिक व्यंग्य वाण (राउंडअप)
सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पार्टी महासचिव राहुल गांधी ने एक स्वर में जहां विपक्ष द्वारा जोरशोर से उठाए जा रहे आतंकवाद के मुद्दे की धार को कंधार प्रकरण के जरिए कुंद करने की कोशिश की वहीं नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने सोनिया गांधी को उनके एक बयान के लिए माफी मांगने की बात कह राजनीतिक पारे को गरमा दिया।
सोनिया ने सिलचर में कहा, "दिसम्बर 1999 में कंधार अपहरण कांड के दौरान अपहृत भारतीयों को छुड़ाने के एवज में तीन खूंखार आतंकवादियों को रिहा कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आतंकवाद से समझौता किया था।"
उन्होंने कहा, "भाजपा ने जिन आतंकवादियों को रिहा किया था उनमें जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक मसूद अजहर भी शामिल था। वही आज देश में तमाम आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दे रहा है। जब तीनों आतंकवादियों को छोड़ा गया था उस समय आडवाणी गृह मंत्री थे। कांग्रेस पार्टी कभी भी आतंकवाद से समझौता नहीं करेगी।"
मनमोहन सिंह ने मुंबई में कहा कि वे कमजोर हैं या मजबूत इसका मूल्यांकन टेलीविजन बहस के आधार पर नहीं वरन उनके प्रदर्शन के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा, "ऊंची आवाज में बोलने से यह साबित नहीं होता है कि कौन कमजोर है और कौन मजबूत। उचित समय पर सटीक जवाब देने से यह साबित होती है।"
उन्होंने कहा, "हमें ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो इन चुनौतियों को समझ सके और युवा पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उनका दोहन कर सके। हमें उनकी आवश्यकता नहीं है जो भारतीय को भारतीय के खिलाफ खड़ा करते हैं और पुरानी विचारधाराओं को ढोते हुए अतीत में जीते हैं।"
तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा दिसम्बर 1999 में अफगानिस्तान के कंधार में तीन आतंकवादियों को रिहा करने का हवाला देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि उनमें से एक (मौलाना मसूद अजहर) ने जैश-ए-मुहम्मद की स्थापना की जो आज देश में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दे रहा है।
उन्होंने कहा, "इसके विपरीत मुंबई हमले के बाद हमने आतंकवादियों से सौदेबाजी नहीं की। भाजपा और हमारे बीच यही अंतर है।" प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हमारे कमांडो व जवानों ने हमें गौरवान्वित किया।
राहुल गांधी ने कोच्चि में लालकृष्ण आडवाणी का नाम लिए बगैर कहा, "विपक्ष के जो नेता हैं उनकी सोच पुरानी है। वे 2009 से 2004 की तरफ देखते हैं। वे वही बोलते हैं जो हमने कर दिखाया है। उनके पास अगले पांच वर्षो की कोई योजना नहीं है।"
आडवाणी द्वारा मनमोहन सिंह को बार-बार कमजोर प्रधानमंत्री बताए जाने पर राहुल ने कहा कि देश जानना चाहता है कि आडवाणी ने यह क्यों कहा था कि 1999 में जब वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह आतंकवादियों को लेकर कंधार गए थे तो इस बात की उन्हें जानकारी नहीं थी। जिस आतंकवादी को छोड़ा गया था उसी ने बाद में संसद पर हमला किया था।
उन्होंने कहा, "दो संभावनाएं हो सकती हैं। या तो आडवाणी झूठ बोल रहे हैं या फिर वे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का भरोसा खो चुके थे।"
उधर, लालकृष्ण आडवाणी ने तिरुवनंतपुरम में सोनिया गांधी से कहा कि वह अपने उस वक्तव्य के लिए माफी मांगें जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के राजनीतिक दल आतंकवादियों से भी अधिक खतरनाक हैं। आडवाणी ने कहा कि सोनिया का इशारा साफ तौर पर भाजपा की ओर था।
केरल में अपना दो दिवसीय चुनाव अभियान खत्म होने पर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए आडवाणी ने कहा, "उनका वक्तव्य कलंकित करने वाला है। उन्हें माफी मांगनी चाहिए या फिर सामने आकर बहस करनी चाहिए कि आखिर खतरा कहां से है भाजपा से या जिहादियों, अल कायदा और आईएसआई की ओर से। "
आडवाणी सोनिया गांधी के उस वक्तव्य का जिक्र कर रहे थे जिसमें उन्होंने झारखंड में एक सभा में कहा था, "देश को उन लोगों से सावधान रहना चाहिए जो देशप्रेम का चोला ओढ़े हुए हैं लेकिन भीतर ही भीतर देश को तोड़ना चाहते हैं। देश को न सिर्फ आतंकवादियों से बल्कि ऐसी पार्टियों से भी खतरा है।"
भाजपा के वरिष्ठ नेता व गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए गुजरात के विकास को प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि में राजग केंद्र की सत्ता में आया तो गुजरात का विकास फार्मूला देश भर में लागू किया जाएगा। हालांकि कांग्रेस और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए मोदी ने उन पर वोट की राजनीति करने का आरोप जरूर लगाया।
मोदी ने पिछले वर्ष मनमोहन सिंह द्वारा दिए गए उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है।
मोदी ने कोडरमा जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, "मुख्यमंत्रियों की एक बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। जबकि भाजपा कहती है कि देश के प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार गरीबों का है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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