मध्य प्रदेश में साध्वी विहीन हुआ चुनाव

अपने भाषणों के जरिए अपनी पहचान बनाने वाली साध्वियों ने मध्य प्रदेश की राजनीति में अपना पर्याप्त असर दिखाया है। इसकी शुरूआत उमा भारती ने 1984 में राजनीति में आकर की थी। उन्होंने खजुराहों से पहला लोकसभा चुनाव भी लड़ा। उसके बाद वे राजनीति के महारथियों में शुमार हो गई। केन्द्रीय मंत्री बनी और फिर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी भी संभाली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उमा भारती का भीड़ जुटाऊ नेता के तौर पर भरपूर उपयोग किया। वर्ष 2008 का विधानसभा चुनाव उन्होंने अपनी पार्टी भारतीय जनशक्ति (भाजश) के बैनर तले लड़ा। इस चुनाव में वे वह करिश्मा नहीं दिखा पाई जिसके लिए वे पहचानी जाती थीं।
विधानसभा चुनावों में थीं तीन साध्वियां
प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव तीन साध्वियां चर्चा में थीं और चुनाव को अपने अपने-अपने तरह से प्रभावित करने की स्थिति में थी। उमा भारती ने जहां भाजश का परचम थामकर भाजपा की नींद उड़ाई थी, वहीं माले गांव बम काण्ड में पकड़ी गई साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का मुद्दा पूरे उफान पर था। प्रज्ञा ठाकुर का मध्य प्रदेश से नाता है और उनका जुड़ाव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से रहा है। इसी के चलते जहां भाजपा ने उनका साथ दिया वहीं कांग्रेस ने प्रज्ञा ठाकुर पर हमले बोले।
इतना ही नहीं कांग्रेस ने भी नन्ही गेरुआ वस्त्र धारी साधना राजपूत का भी विधानसभा चुनाव में भरपूर इस्तेमाल किया। उन्हें बतौर स्टार प्रचारक प्रदेश में जगह-जगह घुमाया गया। साधना राजपूत ने कांग्रेस के लिए भीड़ जुटाने में काफी अहम भूमिका निभाई थी।
प्रदेश के बाहर कार्यक्रमों में व्यस्त साध्वियां
15वीं लोकसभा का चुनाव मध्य प्रदेश में ऐसा है जिसमें अभी तक कोई भी साध्वी किसी भी दल का झंडा थामे नजर नहीं आ रही है। प्रज्ञा ठाकुर का मुद्दा चर्चा में नहीं है, वहीं उमा भारती मध्य प्रदेश को छोड़कर अन्य राज्यों में भाजपा का प्रचार कर रही है तो साधना राजपूत को कांग्रेस ने प्रदेश में बुलाने का कोई कार्यक्रम नहीं बनाया है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष विजेन्द्र सिंह सिसोदिया स्वीकारते है कि पिछले चुनावों में साध्वियों ने भाजपा का प्रचार किया है, मगर इस बार ऐसा नहीं है। वे कहते है कि भाजपा ने कभी भी साध्वियों को चुनाव प्रचार के लिए नहीं बुलाया है बल्कि वे अपनी इच्छा से आती रही है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अरविन्द मालवीय कहते है कि पिछले चुनाव में नन्हीं साध्वी साधना भारती को पार्टी ने चुनाव प्रचार के लिए नहीं बुलाया था बल्कि उनके पिता ही साधना को लेकर चुनाव प्रचार के लिए मध्य प्रदेश आए थे। कांग्रेस ने कभी भी साधु-साध्वियों का इस्तेमाल चुनाव में नहीं किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस ।


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