सत्यम को मिला रणनीतिक निवेशक (राउंडअप)

टेक महिंद्रा ने सत्यम में 31 फीसदी हिस्सेदारी के लिए अपनी अनुषंगी कंपनी वेंटरबरी कंसल्टैंट्स की ओर से सबसे ऊंची बोली लगाई।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को भेजे एक पत्र में वेंटरबरी ने सोमवार को बताया कि वह सत्यम के 302,764,327 शेयर खरीदने की बोली लगाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है और उसने 58 रुपये प्रति शेयर की दर से 1,756 करोड़ रुपये की बोली लगाई है।

सत्यम के नए बोर्ड के सदस्यों ने कंपनी में 31 फीसदी हिस्सेदारी के लिए सबसे ऊंची बोली लगाने की वजह से टेक महिंद्रा का चयन किया।

निर्णय की इस प्रक्रिया से हालांकि सत्यम के दो निदेशक दीपक पारेख और एस.बी मैनाक बाहर रहे। क्योंकि ये दोनों बोली की प्रक्रिया में शामिल कंपनियों से जुड़े हुए हैं।

समझौते के अनुसार निर्णायक स्वामित्व पाने के लिए टेक महिंद्रा को 20 फीसदी शेयर खुले प्रस्ताव की मदद से हासिल करने होंगे। टेक को नीलामी में उल्लिखित राशि 21 अप्रैल तक एस्क्रो खाते में जमा करानी होगी।

सरकार द्वारा नियुक्त सत्यम के छह सदस्यीय बोर्ड की अध्यक्षता नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसिज कंपनीज (नास्कॉम) के पूर्व प्रमुख किरण कार्णिक कर रहे हैं।

इसके अतिरिक्त बोर्ड में एचडीएफसी के प्रमुख दीपक पारेख, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्व सदस्य सी.अच्युतन और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के संरक्षक तरुण दास शामिल हैं।

सत्यम के बोर्ड के प्रमुख किरण कार्णिक ने कहा, "सबसे ऊंची बोली लगाने वाले का चयन साफ और पारदर्शी प्रक्रिया के द्वारा किया गया है। यह कंपनी की स्थिरता और विकास की ओर बढ़ने का संकेत है।"

सत्यम कंप्यूटर सर्विसिज के छह सदस्यीय बोर्ड ने सोमवार को कहा कि कंपनी का पुनरुत्थान हो रहा है। बोर्ड ने यह उम्मीद भी जताई कि कंपनी का भविष्य बेहतर और सुरक्षित होगा।

टेक महिंद्रा द्वारा 1,756 करोड़ रुपये में वित्तीय घोटाले की शिकार सॉफ्टवेयर कंपनी सत्यम के 31 फीसदी शेयर खरीदने संबंधी बोली हासिल करने के बाद आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में बोर्ड के सदस्य खासे संतुष्ट नजर आए।

नास्कॉम के पूर्व प्रमुख और सत्यम बोर्ड अध्यक्ष किरण कार्णिक ने कहा, "कुछ मायनों में सत्यम का पुनर्जन्म हुआ। कंपनी राह भटक गई थी और हमने इसे वापस रास्ते पर लाने की कोशिश की है।"

कंपनी की मुसीबतों की शुरुआत उस समय हुई थी जब गत जनवरी में सत्यम के संस्थापक अध्यक्ष बी. रामालिंगा राजू ने 78 अरब रुपये के घोटाले की बात स्वीकार की थी। इस स्वीकारोक्ति के बाद कंपनी के कर्मचारी और भारतीय उद्योग जगत स्तब्ध रह गया था।

सत्यम के शेयर खरीदने की होड़ में इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टूब्रो (एल एंड टी) व विलबर रॉस कॉग्निजैंट भी शामिल थी। एल एंड टी ने जहां सत्यम के प्रत्येक शेयर के लिए 45 रुपये की पेशकश की वहीं विलबर रॉस ने महज 20 रुपये प्रति शेयर की पेशकश की। टेक महिंद्रा ने 58 रुपये प्रति शेयर की पेशकश की थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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