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ऊंची आवाज में बोलना मजबूती का प्रतीक नहीं : प्रधानमंत्री

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मनमोहन सिंह ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "यदि आप मेरा बयान पढ़ेंगे तो आपको मेरा उत्तर मिल जाएगा। कमजोरी या मजबूती ऊंची आवाज में बोलने से नहीं आती। यह समय पर प्रतिक्रिया करने से आती है।"

भाजपा सरकार के दिसम्बर 1999 में अफगानिस्तान के कंधार में तीन आतंकवादियों को रिहा करने का हवाला देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि उनमें से एक (मौलाना मसूद अजहर) ने जैश-ए-मुहम्मद की स्थापना की।

उन्होंने कहा, "इसके विपरीत मुंबई हमले के बाद हमने आतंकवादियों से सौदेबाजी नहीं की। भाजपा और हमारे बीच यही अंतर है।"

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हमारे कमांडो जवानों ने हमें गौरवान्वित किया।

प्रधानमंत्री ने आतंकवादियों की कंधार में रिहाई से पहले उनसे परामर्श करने के भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह के दावे को भी असत्य करार दिया।

उन्होंने कहा, "राजनाथ ने कहा कि राज्यसभा के नेता विपक्ष रहते हुए आतंकवादियों की रिहाई के पहले मुझसे परामर्श किया गया। यह असत्य है।"

इससे पहले सोमवार सुबह भाजपा नेता आडवाणी ने मनमोहन सिंह को सरकार का कमजोर मुखिया कहा था। अरुण जेटली ने भी आगरा में प्रधानमंत्री को हताश और कमजोर कहा था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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