बैंकॉक में आपातकाल, सैनिकों की तैनाती

विरोध प्रदर्शनों के कारण शनिवार को वहाँ बड़ा एशियाई सम्मेलन रद्द कर दिया गया था.
सरकार ने राजधानी बैंकॉक और आसपास के प्रांतों में आपातकाल की घोषणा तब की जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने गृह मंत्रालय के भवन पर धावा बोल दिया. प्रदर्शनकारी वहाँ प्रधानमंत्री अभिसीत वेचाचिवा को घेरने के इरादे से आए थे.
लोकतंत्र और न्यायतंत्र की परिधि में प्रदर्शनकारियों की जो भी माँगें हैं, उन पर चर्चा के लिए वे अपने प्रतिनिधियों को मेरे पास भेज सकते हैं. लेकिन जो प्रदर्शनकारी क़ानून के विरुद्ध आचरण कर रहे हैं, या दूसरों को ऐसा करने के लिए उकसा रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ हम गंभीर क़ानूनी क़दम उठाएँगे थाईलैंड के प्रधानमंत्री
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बाद में जब राजधानी में सेना को तैनात कर दिया गया, तो भी प्रदर्शनों का सिलसिला नहीं थमा. शोर मचाते और तालियाँ बजाते प्रदर्शनकारी एक जगह सेना की बख़्तरबंद गाड़ियों पर जा चढ़े.
बीबीसी संवाददाता ने बताया है कि सरकार विरोधी प्रदर्शनों के कारण थाइलैंड में होने वाले आसियान क्षेत्रीय सम्मेलन को रद्द कर दिया गया है. जो कि सरकार के लिए शर्मिंदगी की बात है.
इसलिए प्रधानमंत्री वेचाचिवा ने कड़ा रुख़ अपनाते हुए चेतावनी दी है कि जो प्रदर्शनकारी सम्मेलन के आयोजन में अवरोध बने हैं, उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.
विरोध
टेलीविज़न पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें सत्ता से हटाने के उद्देश्य से किया जा रहा आंदोलन अवैध होता जा रहा है.
वेचाचिवा ने कहा, "लोकतंत्र और न्यायतंत्र की परिधि में प्रदर्शनकारियों की जो भी माँगें हैं, उन पर चर्चा के लिए वे अपने प्रतिनिधियों को मेरे पास भेज सकते हैं. लेकिन जो प्रदर्शनकारी क़ानून के विरुद्ध आचरण कर रहे हैं, या दूसरों को ऐसा करने के लिए उकसा रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ हम गंभीर क़ानूनी क़दम उठाएँगे."
आपातकाल घोषित किए जाने के बाद अब बैंकॉक में पाँच से ज़्यादा लोगों के एक जगह जमा होने पर रोक लगा दी गई है.
राजधानी के महत्वपूर्ण ठिकानों पर सेना को तैनात कर दिया गया है.
लेकिन आपातकाल कितना प्रभावी होगा, इसको लेकर संदेह है. दरअसल पिछले साल अभिसीत के विरोधियों की अगुआई वाली सरकार ने कई मौक़ों पर आपातकाल की घोषणा की थी.
लेकिन कभी भी उसका पूरा असर नहीं दिखा था. उस दौरान सेना स्थिति पर क़ाबू पाने में नाकाम रही थी.
बैंकॉक में बुधवार को भी हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री अभिसित वेज्जाजिवा को पद से हटाने की माँग करते हुए इकट्ठा हुए थे.
प्रदर्शनकारियों में ज़्यादातर भूतपूर्व प्रधानमंत्री टकसिन चिनावाट के समर्थक थे. चिनावाट को वर्ष 2006 में तख़्ता पलट के बाद हटा दिया गया था और अगर वह निर्वासन से लौटते हैं तो उनको जेल की सज़ा हो सकती है.


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