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मीरा सान्याल: नए बदलाव का नया चेहरा

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Meera Sanyal

मीरा सान्याल का संबंध ना ही किसी राजनैतिक पार्टी से है, न ही वो किसी नेता की बहन, बेटी या बहू हैं, न ही उनके पास करोड़ों की दौलत है और ना ही किसी बड़े आदमी की छत्रछाया.फिर भी चुनावी अखाड़े में उतर आई हैं तो आख़िर क्यों. 

जी हाँ, आमतौर पर आजकल चुनाव लड़ने के लिए जिन योग्यताओं की ज़रुरत होती है मीरा सान्याल इनमें से किसी भी शर्त पर पूरी नहीं उतरती हैं. लेकिन वो इस बार मुंबई की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली सीट, दक्षिण मुंबई से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरी हैं. मीरा एक पढ़ी लिखी 'प्रोफ़ेशनल' हैं.

एक ऐसी महिला जो अपने ड्राइंग रुम से निकलकर राजनीति के अखाड़े में आ गई है, जो ये गर्व से कहना चाहती है कि हाँ, मैं भारत की नागरिक हूँ और मैं अपने मौलिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए चुनाव लड़ना चाहती हूँ.

वैसे मीरा सान्याल इन दिनों ख़ासी चर्चा में हैं. पेशे से इन्वेस्टमेंट बैंकर मीरा सान्याल एबीएन एमरो बैंक की सीईओ हैं जिन्होंने चुनाव लड़ने के लिए कुछ दिनों की छुट्टी ली हुई है. आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि मीरा ने ये फ़ैसला पिछले साल नवंबर में मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के बाद लिया.

चुनाव लड़ने का फ़ैसला

 आमतौर पर मीरा जैसे पढ़े लिखे लोग जिनके पास एक अच्छी नौकरी, सुविधायुक्त जीवन शैली हो वो आमतौर पर अपने एयरकंडीशन दफ़्तरों और घरों में बैठकर देश और समाज के भविष्य पर चर्चा तो ख़ूब करते हैं लेकिन किसी भी बदलाव के लिए आगे आने की ज़हमत कभी नहीं उठाते, ऐसे में मीरा का ये क़दम लोगों का ध्यान अपनी तरफ. खींच रहा है.  

 आमतौर पर मीरा जैसे पढ़े लिखे लोग जिनके पास एक अच्छी नौकरी, सुविधायुक्त जीवन शैली हो वो आमतौर पर अपने एयरकंडीशन दफ़्तरों और घरों में बैठकर देश और समाज के भविष्य पर चर्चा तो ख़ूब करते हैं लेकिन किसी भी बदलाव के लिए आगे आने की ज़हमत कभी नहीं उठाते, ऐसे में मीरा का ये क़दम लोगों का ध्यान अपनी तरफ. खींच रहा है.

जब मैने मीरा से ये पूछा कि आख़िर उन्होंने चुनाव लड़ने का फ़ैसला क्यूं किया तो मीरा ने जवाब दिया, “देखिए, 26 नवंबर की घटना के बाद जिस तरह से हमारे नेताओं का रवैया देखने में आया उससे मुझे घोर निराशा हुई."

उन्होंने देश के पुराने नेताओं से तुलना करते हुए कहा, “आप देखें तो पीछे के ज़माने में हमारे देश मे कितने अच्छे नेता हुए हैं जिन्होंने न जाने कितने बलिदान दिए और हमारे देश को आज़ादी दिलवाई, आजकल के ज़माने में स्थिति बिल्कुल उल्टी हो गई है."

मुंबई की बात करते हुए मीरा ने कहा, “मुंबई की अगर बात करें तो इतनी सारी परेशानियों से आम आदमी को रोज़ गुज़रना पड़ता है, सुबह उठते ही सिर पकड़कर सोचना पड़ता है कि आज के दिन सही सलामत कैसे काम पर जाएं, हर व्यक्ति डरा हुआ है सहमा हुआ है."

सुरक्षा बड़ा मुद्दा

उन्होंने इसी के बारे में कहा, “यहाँ सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा हो गया है, आपका बच्चा तीन साल का हो या आपकी बच्ची बीस साल की हो आपको स्कूल और कॉलेज में एडमिशन के लिए हाथ पैर जोड़ने ही पड़ेंगे, और कई सारी समस्याएँ हैं जिन्हें देखकर मुझे लगा कि अगर इनका कुछ समाधान करना है तो ख़ुद ही आगे आना पड़ेगा."

मीरा किस तरह से काम करना चाहती हैं? इस हवाले से उन्होंने कहा, “मेरे पास अपनी योजनाओं की एक सूची तैयार है, जिसे अगर मैं जीत कर आई तो एक रणनीति के तहत प्राथमिकता के अनुसार उन्हें एक-एक करके पूरा करने की कोशिश करुंगी."

उन्होंने अपने अनुभव के बारे में कहा कि मेरे पास बैंकिंग का पच्चीस साल का अनुभव है, अपने उस अनुभव का उपयोग करते हुए मैं कुछ ठोस काम करना चाहती हूँ. मीरा सान्याल का कहना है बैंकिंग के उनके 25 साल के अनुभव का वह प्रयोग करेंगी.उन्होंने कहा, “मैं जानती हूँ कि जो चीज़ें मैने तय की हैं वो सारी इकट्ठे पूरी नहीं होंगी लेकिन फिर भी कोशिश रहेगी कि हम ज़्यादा से ज़्यादा काम कर सकें."

अलग उत्साह

मीरा में एक ग़ज़ब का उत्साह देखने को मिलता है. आमतौर पर नेता अपने साथ लाव-लश्कर लेकर चलते हैं लेकिन मीरा के साथ उनके दो चार समर्थक ही नज़र आए. वो सबके पास जाती हैं और पहले हाथ जोड़कर अपना परिचय देने के बाद उनसे चुनाव में वोट डालने की अपील करती हैं.

जब मैने उनसे ये पूछा कि उन्हें जीत का कितना भरोसा है तो उन्होंने हंसते हुए कहा, “देखिए, मैं ये जानती हूँ कि लोगों को अगर मेरे बारे में पता चलेगा तो वो मेरा समर्थन ज़रुर करेंगे और मैं चुनाव जीतूं या हारूं मेरे लिए इसमें हिस्सा लेना सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है." मीरा ने कहा, “मुझे रोज़ाना ढेरों ईमेल और एसएमएस आ रहे हैं लोग इस क़दम की सराहना कर रहे हैं तो मेरा मानना है कि मेरे इस क़दम से और कई मीराओं को आगे आने का हौसला मिला है."

आमतौर पर मीरा जैसे पढ़े लिखे लोग जिनके पास एक अच्छी नौकरी, सुविधायुक्त जीवन शैली हो वो आमतौर पर अपने एयरकंडीशन दफ़्तरों और घरों में बैठकर देश और समाज के भविष्य पर चर्चा तो ख़ूब करते हैं लेकिन किसी भी बदलाव के लिए आगे आने की ज़हमत कभी नहीं उठाते, ऐसे में मीरा का ये क़दम लोगों का ध्यान अपनी तरफ. खींच रहा है.

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