पंजाब में मनमोहन सिंह कोई 'मुद्दा' नहीं

Manmohan Singh
चंडीगढ़। कांग्रेस पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने की घोषणा उनके गृह राज्य पंजाब के चुनावी परिदृश्य में कुछ खास असर नहीं डाल रहा है। पंजाब सिख बहुल देश का एकमात्र राज्य है और कांग्रेस भी इस तथ्य को भुनाने में विफल हो रही है कि मनमोहन सिंह पहले सिख प्रधानमंत्री हैं।

प्रदेश कांग्रेस इसके बजाय राज्य के मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है। एक वरिष्ठ कांग्रेस विधायक ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं कि वह सिख हैं और उनकी जड़े पंजाब में हैं। लेकिन उन्होंने पंजाब में मुश्किल से ही कोई राजनीति की है। यद्यपि सिख समुदाय मानता है कि कांग्रेस ने एक जाने माने सिख को प्रधानमंत्री बनाया है लेकिन इसका एक छोटा धड़ा ही वोट में तब्दील हो पाएगा।"

उन्होंने कहा, "यहां लोगों से जुड़े और राज्य में अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के कुशासन से जुड़े कई मुद्दे हैं।" एक किसान भागवंत सिंह ने कहा, "मनमोहन सिंह एक प्रसिद्ध आदमी हैं और प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने अच्छा काम किया। लेकिन पंजाब के लोग ज्यादा स्थानीय मुद्दों के बारे में चिंतित हैं।"

वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के आरोपी कांग्रेस नेता जगदीस टाइटलर और सज्जन कुमार को टिकट दिए जाने और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा उन्हें क्लिन चिट दिए जाने के बाद उभरे आक्रोश के बीच भी प्रदेश इकाई अपने प्रचार अभियान में मनमोहन सिंह को नहीं भुना रही है। हालांकि कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए इन दोनों नेताओं के टिकट वापस ले लिया है।

भाजपा नेता और प्रदेश मंत्रिमंडल में मंत्री मनोरंजन कालिया ने कहा, "टाइटलर और सज्जन कुमार को टिकट दिए जाने के मुद्दे पर मनमोहन सिंह को एक सिख होने के नाते पद छोड़ देना चाहिए था।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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