अलगाववादी नेता सज्जाद चुनाव लड़ेंगे

शनिवार को श्रीनगर में एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने अपने फ़ैसले की जानकारी दी. उनकी पार्टी पीपुल्स कॉन्फ़्रेंस ने उनके फ़ैसले का समर्थन किया है.
सज्जाद लोन ने कहा कि संसदीय चुनाव में खड़े होने का फ़ैसला वैचारिक बदलाव नहीं बल्कि रणनीति में बदलाव है. उन्होंने कहा कि यह अलगाववादी आंदोलन के लिए झटका नहीं है.
उन्होंने कहा, "अलगाववादी आंदोलन को झटका देने के लिए सज्जाद बहुत छोटे हैं." सज्जाद लोन ने कहा कि उन्हें भारतीय संविधान में भरोसा नहीं है लेकिन अगर जीते तो भारी मन से शपथ लेंगे.
उन्होंने कहा कि वे भारतीय संसद में कश्मीरी लोगों की भावनाओं और आकांक्षाओं को रखेंगे.
सज्जाद लोन ने कहा, "मैं भारतीय संसद से कहूँगा कि कश्मीरी जनता उनके साथ नहीं रहना चाहती. मैं उनसे यह कहूँगा कि वे इस मसले का ऐसा समाधान खोजें, जो वहाँ की जनता को संतुष्ट करे."
सज्जाद लोन कश्मीर के चर्चित अलगाववादी नेता अब्दुल ग़नी लोन के छोटे बेटे हैं. अब्दुल ग़नी लोन की कुछ वर्ष पहले गोली मार कर हत्या कर दी गई थी.
सज्जाद लोन ने अपनी पिता की हत्या के लिए पाकिस्तान समर्थक चरमपंथी गुट को ज़िम्मेदार ठहराया था.
'आह्वान की नाकामी'
सज्जाद लोन का कहना है कि वे कभी भी ठेठ अलगाववादी नेता नहीं थे.
मैं भारतीय संसद से कहूँगा कि कश्मीरी जनता उनके साथ नहीं रहना चाहती. मैं उनसे यह कहूँगा कि वे इस मसले का ऐसा समाधान खोजें, जो वहाँ की जनता को संतुष्ट करे सज्जाद लोन
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पिछले साल जब कश्मीर घाटी में लाखों लोगों ने भारत विरोधी मार्च में हिस्सा लिया तो उन्होंने अलगाववादी आंदोलन को अपना समर्थन दिया और अलगाववादी नेता के रूप में चर्चित हुए.
पिछले साल नवंबर-दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव का सज्जाद लोन ने बहिष्कार किया था. लेकिन बहिष्कार का आह्वान नाकाम रहा और बड़ी संख्या में लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया.
सज्जाद लोन का कहना है कि बहिष्कार के आह्वान की नाकामी ही वो वजह है जिससे वे चुनाव में खड़े हैं.
चुनाव लड़ने के सज्जाद लोन के फ़ैसले पर एक प्रमुख अलगाववादी नेता मुश्तक़ुल इस्लाम ने कहा है कि सज्जाद हमेशा से भारतीय एजेंसियों के हाथ का खिलौना रहे हैं.
उन्होंने कहा कि सज्जाद पिछले चुनाव में भी अप्रत्यश रूप में शामिल थे और इस बार नक़ाब हटाकर सामने आ गए हैं.
सज्जाद लोन के भाई बिलाल लोन पीपुल्स कॉन्फ़्रेंस के एक अन्य धड़े का नेतृत्व करते हैं और वे मीर वाइज़ उमर फ़ारूक़ के नेतृत्व वाले हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के भी नेता हैं.


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