'हमेशा ग़लत पक्ष में रहे हैं वामपंथी'

Manmohan Karat

वामपंथियों के गढ़ में जाकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन पर कई सवाल उठाए हैं और कहा है कि वामपंथी पार्टियाँ इतिहास में हमेशा ग़लत पक्ष में रहे हैं. एक समय संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार को समर्थन देने वाले वामपंथी दलों पर प्रधानमंत्री ख़ूब बरसे.

कम्युनिस्ट पार्टी के गढ़ केरल के कोच्चि शहर में एक चुनावी सभा के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि वामपंथी पार्टियाँ इतिहास में हमेशा ग़लत पक्ष में रहे हैं. उन्होंने कहा कि वामपंथी दलों ने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लेने से मना किया, तो हरित क्रांति और सूचना तकनीक क्रांति से भी अलग रहे. और तो और उन्होंने परमाणु समझौते का भी विरोध किया.

अपील

मनमोहन सिंह ने तीसरे मोर्चे की भी अप्रत्यक्ष रूप से खिंचाई की. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कांग्रेस पार्टी की स्थिरता और अन्य पार्टियों के गठबंधन के बीच में से एक को चुनें. वामपंथी दल इस राज्य में सत्ता में हैं. लेकिन दुर्भाग्य से वे हमेशा इतिहास में ग़लत पक्ष में रहे हैं.

जब महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया, तो वामपंथियों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया. जब भारत आज़ाद हुआ तो उन्होंने कहा कि ये आज़ादी वास्तविक नहीं है मनमोहन सिंह

वामपंथी दल इस राज्य में सत्ता में हैं. लेकिन दुर्भाग्य से वे हमेशा इतिहास में ग़लत पक्ष में रहे हैं. जब महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया, तो वामपंथियों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया. जब भारत आज़ाद हुआ तो उन्होंने कहा कि ये आज़ादी वास्तविक नहीं है

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये पार्टियाँ सत्ता से आकर्षित होकर एक हुई हैं और इन पार्टियों को सत्ता को लेकर काफ़ी संघर्ष है. दिल की बाईपास सर्जरी के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पहली बार किसी चुनावी सभा को संबोधित किया.

वामपंथी दलों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा, "वामपंथी दल इस राज्य में सत्ता में हैं. लेकिन दुर्भाग्य से वे हमेशा इतिहास में ग़लत पक्ष में रहे हैं. जब महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया, तो वामपंथियों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया. जब भारत आज़ाद हुआ तो उन्होंने कहा कि ये आज़ादी वास्तविक नहीं है."

मनमोहन सिंह ने कहा कि जब 1960 के दशक में इंदिरा गांधी ने हरित क्रांति की शुरुआत की, तो वामपंथियों ने यह कहकर इसका विरोध किया कि यह विदेशी बीज कंपनियों के फ़ायदे के लिए है.

'सही फ़ैसला'

प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी तरह जब राजीव गांधी ने संचार क्रांति की शुरुआत की, तो वामपंथियों ने यह कहा कि इससे लोगों की नौकरियाँ चली जाएँगी. जब हमारी सरकार ने अमरीका के साथ परमाणु समझौते की शुरुआत की, तो वाम दलों ने इसका विरोध किया और समर्थन वापस ले लिया. जबकि परमाणु समझौता देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए था. ताकि देश का विकास हो सके और परमाणु क्षेत्र में भारत अलग-थलग न पड़े मनमोहन सिंह

जब हमारी सरकार ने अमरीका के साथ परमाणु समझौते की शुरुआत की, तो वाम दलों ने इसका विरोध किया और समर्थन वापस ले लिया. जबकि परमाणु समझौता देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए था. ताकि देश का विकास हो सके और परमाणु क्षेत्र में भारत अलग-थलग न पड़े

मनमोहन सिंह ने अमरीका के साथ परमाणु समझौते का भी ज़िक्र किया. इसी मुद्दे पर वामपंथी दलों ने यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया था.

उन्होंने कहा, "जब हमारी सरकार ने अमरीका के साथ परमाणु समझौते की शुरुआत की, तो वाम दलों ने इसका विरोध किया और समर्थन वापस ले लिया. जबकि परमाणु समझौता देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए था. ताकि देश का विकास हो सके और परमाणु क्षेत्र में भारत अलग-थलग न पड़े."

मनमोहन सिंह ने कहा कि आने वाला समय ये साबित करेगा कि परमाणु समझौते को लेकर सरकार का फ़ैसला बिल्कुल सही था.

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