हैसियत पर हसरत की जीत की कहानी

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हैसियत पर हसरत की जीत की कहानी

राघव ने एक ऐसा रेडियो ट्रांसमीटर विकसित किया है जो बेहद सस्ता है साथ ही राघव एक किफ़ायती रेडियो सेट भी बनाने में लगे हैं.

ग़रीबी में पले बढे राघव को ना तो विज्ञान की कोई तालीम नसीब हुई, ना ही वो इंजीनियर है, लेकिन प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता बनकर राय ने उनकी प्रतिभा को पहचानकर उनको अपने सपनों को साकार करने का मौक़ा और मंच उपलब्ध कराया है.

राघव ने वर्ष 2006 में मंसूरपुर में जब अपने कबाड़ और जुगाड़ को मिलाकर रेडियो चलाया तो उन्हें नहीं पता था की वो ग़ैर कानूनी है. लेकिन अब राघव को संतोष है कि तिलोनिया में सब कुछ क़ानून के अनुसार है और संसाधन भी है.

तिलोनिया कम्युनिटी रेडियो

हमारे रेडियो ने प्रायोगिक तौर पर प्रसारण शुरु कर दिया है. इसका प्रसरण उपकरण राघव ने ही तैयार किया है, ये कामयाब रहा, राघव कार्यक्रम संपादित,निर्माण और तैयार करता है, जल्द ही हमें सरकार लाइसेंस दे देगी, जो 20 किलो मीटर तक आस पास के गांव तक सुने जा सकेंगे रेडियो की इनचार्ज रतन देवी

हमारे रेडियो ने प्रायोगिक तौर पर प्रसारण शुरु कर दिया है. इसका प्रसरण उपकरण राघव ने ही तैयार किया है, ये कामयाब रहा, राघव कार्यक्रम संपादित,निर्माण और तैयार करता है, जल्द ही हमें सरकार लाइसेंस दे देगी, जो 20 किलो मीटर तक आस पास के गांव तक सुने जा सकेंगे

उनका कहना है, ''मैं यहाँ बहुत ही खुश हूँ, एक ट्रांसमीटर बनाया है, जो रेडियो कार्यक्रम प्रसारित कर सकता है. इसकी क़ीमत महज़ पांच सौ रूपए है, जबकि बाज़ार में ये कोई चार लाख रूपए में मिलता है."

कभी उनकी आवाज़ मंसूरपुर से गूंजती थी, 'अब जब हर रोज़ ये तिलोनिया का कम्युनिटी रेडियो है, राम राम, अब आप लोक गीत सुनो' ...की ध्वनी जब तरंगो से लोगों तक पहुँचती है तो राघव के चेहरे पर मुस्कान फ़ैल जाती है.

तिलोनिया के मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता और अनुसंधान केंद्र (एसडब्लूआरसी) ने जब कम्युनिटी रेडियो का काम शुरु किया तो राघव को म़ौका दिया गया.

इस रेडियो की प्रभारी रतन देवी कहती है, "हमारे रेडियो ने प्रायोगिक तौर पर प्रसारण शुरु कर दिया है. इसका प्रसरण उपकरण राघव ने ही तैयार किया है, ये कामयाब रहा, राघव कार्यक्रम संपादित, निर्माण और तैयार करता है, जल्द ही हमें सरकार लाइसेंस दे देगी, तब कार्यक्रम 20 किलो मीटर तक आस पास के गांव तक सुने जा सकेंगे."

राघव ने एक रेडियो सेट भी तैयार किया हो, जो बाज़ार से सस्ता है और छह घंटे चार्ज करने के बाद उससे दस दिन तक काम लिया जा सकता है.

राघव कहते हैं, "रेडियो टीवी से अच्छा है, इसमें आप काम करते हुए भी सुन सकते है, हम लोगों की अपनी भाषा में कार्यक्रम तैयार कर प्रसारित करेंगे, इसमें ग़रीबों का भला होगा."

राघव की कहानी बताती है हैसियत चाहे छोटी हो, हसरत बड़ी हो तो कामयाबी की मंजिल ख़ुद क़दमों तक आ जाती है.

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