पद्मश्री मिलना मेरी कला की पहचान है: हेमी बावा

मधुश्री चटर्जी

नई दिल्ली, 11 अप्रैल(आईएएनएस)। इस साल प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्श्री हासिल करने वाली पेंटर हेमी बावा अपनी अब तक की कला यात्रा से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि पद्मश्री से उनकी कला को पहचान मिली है।

उन्होंने अपने आवास पर आईएएनएस से बातचीत में कहा, "मैं पिछले तीन दशकों से कला क्षेत्र में सक्रिय हूं और मुझे यह सोचकर खुशी होती है कि लोगों को मेरी कला पंसद है। मुझे अपने अब तक के सफर पर गर्व है।"

61 वर्षीया हेमी की कला को आम जिंदगी से प्रेरणा मिलती रही है। वह शीशे पर चित्र उभार कर जिंदगी के पहलुओं को अभिव्यक्त करने में कुशल हैं। वह कहती हैं, "शीशा एक ऐसा माध्यम है जो मेरी कला और शख्सियत दोनों को अभिव्यक्त करता है।"

वह अगस्त में आयोजित होने वाली अपनी कला प्रदर्शनी की तैयारी में अभी से ही जुट गई हैं। शीशे के अलावा वह कैनवस पर भी पेंटिंग करती हैं। वह संगतराशी में भी कुशल हैं। वह कहती हैं, "मेरी कला बहुआयामी है। मैं विषयों की विविधता पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करती हूं। मैं जीवन और प्रकृति की संवेदनाओं को कला में समाहित करने पर जोर देती रही हूं।"

दिल्ली में जन्मी बावा बचपन से ही पेंटिंग करती रही हैं। देश-दुनिया के कई हिस्सों में उनकी कला प्रदर्शनी आयोजित हो चुकी हैं। 1996 में कोका कोला ने उन्हें ओलंपिक खेल समारोह के लिए एक मूर्ति गढ़ने की जिम्मेवारी सौंपी थी। आठ फुट लंबी यह मूर्ति आज अटलांटा में इस कंपनी के संग्रहालय में रखी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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