धोखाधड़ी से लिए गए ऋण के भुगतान के बावजूद मुकदमा उचित : सर्वोच्च न्यायालय

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नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि फर्जी तौर तरीके अपनाकर लिए गए ऋण का भुगतान कर दिए जाने के बावजूद उधार लेने वाले व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाना उचित होगा।

सर्वोच्च न्यायालध के न्यायाधीश एस. बी. सिन्हा और न्यायाधीश मुकुंदकम शर्मा की पीठ ने यह फैसला बुधवार को सुनाया।

पश्चिम बंगाल की एक महिला ने फर्जी तरीके से लिए गए ऋण का भुगतान कर दिए जाने के बाद स्वयं को बरी किए जाने की मांग की थी।

महिला की याचिका खारिज करते हुए खंडपीठ ने कहा, "उधारदाता और ऋणी द्वारा दिए गए बयान से पता चलता है कि ऋण लेने के लिए धोखाधड़ी व फर्जीवाड़े के अलावा आपराधिक षड्यंत्र रचे गए, जो ऋण की राशि चुका देने से खत्म नहीं हो जाते।"

खंडपीठ ने कहा, "यह काूनन द्वारा स्थापित सिद्धांत है कि दीवानी और फौजदारी दोनों मुकदमे साथ-साथ चल सकते हैं। बैंक ऋणी को दिए गए ऋण को वसूलने का हकदार है।"

खंडपीठ ने कहा, "यदि ऋण हासिल करने के लिए संबंधित व्यक्ति ने बैंक अधिकारियों की मदद से आपराधिक तरीके अपनाए हैं तो उसके खिलाफ स्पष्ट रूप से आपराधिक मुकदमा चलेगा।"

सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय व निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि सभी अदालतों ने कहा कि आरोपी को दीवानी विवाद को सुलझा लेने के कारण आपराधिक मामले में छूट नहीं दी जा सकती।

यह मामला कोलकाता की महिला रुमि धर से जुड़ा है जिसने वर्ष 1993 में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से ऋण लिया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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