मनमोहन व अडवाणी को लेकर कांग्रेस-भाजपा में नोकझोंक (राउंडअप)
कांग्रेस ने कहा कि आडवाणी के पास कोई मुद्दा नहीं है, जबकि मनमोहन सिंह के पास अपनी सरकार की बेहतरीन उपलब्धियां हैं। दूसरी ओर भाजपा ने कहा कि मनमोहन सिंह के पास सरकार में कोई अधिकार ही नहीं रहा है।
आडवाणी ने टीवी न्यूज चैनल सीएनएन-आईबीएन के साथ बातचीत में कहा, "मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री पद तो संभालते हैं लेकिन उनके पास कोई अधिकार नहीं है, जबकि जो व्यक्ति अधिकार का इस्तेमाल कर रहा है उसकी कोई जवाबदेही नहीं है।" आडवाणी का इशारा सोनिया गांधी की ओर था।
दोनों पार्टियों के बीच गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की उस टिप्पणी को लेकर भी वाकयुद्ध शुरू हो गया है, जिसमें मोदी ने कांग्रेस को 125 साल की बुढ़िया बाताया था। कांग्रेस ने इस टिप्पणी में बूढ़ी महिलाओं का अपमान करने के लिए मोदी से माफी मांगने की मांग की।
कांग्रेस प्रवक्ता जयंती नटराजन ने संवाददाताओं को बताया कि यह टिप्पणी न केवल मोदी की सोच जाहिर करती है, बल्कि यह भाजपा की सोच भी जाहिर करती है।
उधर प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश में आयोजित एक रैली के दौरान मोदी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने उपस्थित जन समूह से पूछा, "क्या मैं बूढ़ी दिखती हूं? क्या सोनिया गांधी या राहुल गांधी आप को बूढ़े दिखते हैं?"
दूसरी ओर सोनिया गांधी ने शनिवार को बिहार के जमुई में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास कोई मुद्दा नहीं है। यही कारण है कि उसके नेता बिना किसी मुद्दे के केवल प्रधानमत्री मनमोहन सिंह को घेरने का प्रयास कर रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता लालकृष्ण आडवाणी को आड़े हाथों लेते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि जब वह गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री थे तो उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ क्या किया। गांधी ने कहा कि उन्होंने तो देश की जेल में बंद एक दुर्दांत आतंकवादी को भी जेल से बाहर निकाल दिया था।
सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को काबिल प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि मुंबई हमले के बाद उनके कूटनीति प्रयास ही थे कि पाकिस्तान को मानना पड़ा कि उसके यहां आतंकवादी हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस जो वादा करती है उसे निभाना भी जानती है। कांग्रेस ही एक ऐसी पार्टी है जिसके दो नेता इंदिरा गांधी और राजीव गांधी आतंकवाद से लड़ते हुए आतंकवाद की भेंट चढ़ गए।
आडवाणी ने अपनी टिप्पणी में कहा, "कई ऐसे मौके आए हैं जब प्रधानमंत्री ने कुछ प्रस्तावों की घोषणा की, लेकिन वह उसे तब तक क्रियान्वित नहीं कर सके जब तक कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की मंजूरी नहीं मिल गई।"
भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार आडवाणी ने कहा, "मैं तथ्यों के आधार पर उन्हें केवल एक कमजोर प्रधानमंत्री मानता हूं। मैंने पूर्व में ऐसे प्रधानमंत्रियों को भी देखा है जिनके पास केवल चार सांसदों का समर्थन था लेकिन इसके बावजूद वे कभी कमजोर नहीं पड़े।"
उन्होंने कहा, "मैंने चंद्रशेखर और एच. डी. देवेगौड़ा को देखा है।"
उल्लेखनीय है कि आडवाणी के इस बयान से एक दिन पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने महिला पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि वह आडवाणी के साथ टेलीविजन पर बहस नहीं चाहते हैं, क्योंकि वह आडवाणी को एक 'वैकल्पिक' प्रधानमंत्री का दर्जा नहीं देना चाहते।
इस पर भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान पूछा, "यदि मुख्यमंत्रियों और विधायकों के बीच चर्चा हो सकती है तो प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों के बीच चर्चा क्यों नहीं हो सकती?"
प्रसाद ने पूछा, "आखिर वह इस चुनौती को स्वीकार क्यों नहीं कर रहे हैं?" प्रसाद ने कहा कि चर्चा से भागना कई तरह के संकेत देता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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