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शाही इमाम की मुसलमानों को अपनी पार्टी बनाने की सलाह

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शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने आईएएनएस से कहा,"इस देश का मुसलमान हमेशा से धर्मनिरपेक्ष रहा है और उसने कभी धार्मिक आधार पर मतदान नहीं किया। वह ऐसी पार्टियों को वोट देता रहा है जिनके नेता हिंदू रहे हैं। यहां तक कि उन्होंने 1977 और 1989 में भारतीय जनता पार्टी को भी समर्थन दिया।"

उन्होंने कहा कि मुसलमान जिन पार्टियों को वोट देते रहे हैं उनमें से किसी ने भी अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण के लिए कुछ भी नहीं किया। इसी कारण से वह सोचते हैं कि मुस्लिमों को अपनी राजनीतिक पार्टी का गठन करना चाहिए।

उत्तर प्रदेश में जहां मतदाताओं में करीब 20 प्रतिशत मुसलमान हैं, के बारे में बुखारी ने कहा कि वहां मुस्लिम समुदाय का विश्वास सभी राजनीतिक दलों से उठ चुका है।

उन्होंने कहा,"राजनीतिक दल मुसलमानों को महज वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करते हैं। वे वास्तव में समुदाय के अधिकारों या प्रगति और कल्याण के लिए परेशान नहीं हैं।"

समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खिलाफ बोलते हुए बुखारी ने कहा कि बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए जिम्मेदार लोग मुलायम के मित्र बन गए हैं। यदि वह उनको नहीं हटाते तो समाजवादी पार्टी से समर्थन वापस खींचने के लिए समुदाय ज्यादा नहीं सोचेगा। शाही इमाम ने कांग्रेस पार्टी की भी निंदा की।

उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में मुसलमानों के कल्याण के लिए परेशान है तो उसने सच्चर समिति रिपोर्ट की सिफारिशों पर कार्य क्यों नहीं किया? सच्चर समिति की रिपोर्ट कांग्रेस और उसके द्वारा किए गए कार्यो का आईना है।

बुखारी ने वर्ष 1984 में सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय की मांग के लिए सिख समुदाय की एकजुटता की प्रशंसा करते हुए कहा कि मुसलमानों को भी एकजुट होकर अपने लिए काम करना चाहिए।

उन्होंने इस मामले में मुसलमानों को सिखों से सीख लेने की सलाह भी दी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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