अमेरिका में अंधाधुंध गोलीबारी की घटनाओं के पीछे मंदी!

सैन फ्रांसिस्को, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी अखबारों, टीवी चैनलों और इंटरनेट पर इन दिनों दो तरह की सुर्खियों में काफी समानताएं हैं। आर्थिक संकट के गहराने के साथ ही हत्याओं का सिलसिला भी जोर पकड़ रहा है। अंधाधुंध गोलीबारी में लोगों को मौत के मुंह में धकेलने के पीछे आर्थिक दुश्वारियों से पैदा हुए घातक तनाव की खास भूमिका है।

यूं तो ऐसी सभी घटनाओं के पीछे आर्थिक तनाव की ही भूमिका नहीं है, पर विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी वारदातों में तेजी की प्रमुख वजहों में आर्थिक दुश्वारी भी शामिल हैं। वाशिंगटन पोस्ट अखबार के मुताबिक पिछले महीने सामूहिक हत्याओं की आठ वारदातें हुईं, जिनमें 57 लोगों की मौत हुई।

कैलीफोर्निया में एक 69 वर्षीय व्यक्ति ने अंधाधुंध गोलीबारी कर एक व्यक्ति की जान ले ली। उसने तीन लोगों को जख्मी भी कर दिया। वह आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा था। इसी तरह पीट्सबर्ग में एक व्यक्ति ने तीन पुलिसकर्मियों की जान ले ली। यह व्यक्ति बेरोजगारी के कारण परेशान था।

चंद रोज पहले न्यूयार्क के बिंगहैम्पटन में एक वियतनामी ने एक आव्रजन केंद्र में करीब 100 राउंड गोलियां चलाईं और 13 लोगों की जान ले ली। बताया जाता है कि वह एक वैक्यूम क्लीनर कंपनी से निकाले जाने से दुखी था। जाने-माने अपराध विशेषज्ञ जेम्स एलन फॉक्स ने वाशिंगटन पोस्ट से बातचीत में कहा, "लोगों में असुरक्षा की भावना और मायूसी है। ऐसे में उनमें अपनी नियति के लिए दूसरों को दोषी मानने की प्रवृति जोर पकड़ रही है। ऐसा विनाशकारी गुस्सा इसी का परिणाम है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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