आडवाणी को विकल्प बनने का मौका नहीं देना चाहता : मनमोहन
इंडियन वूमन प्रेस कोर्प्स के सदस्यों से चर्चा में मनमोहन सिंह ने कहा, "सार्वजनिक मंच पर बोलने में मैं आडवाणी का मुकाबला नहीं कर सकता। मैं अच्छा वक्ता नहीं हूं लेकिन मैं निर्णय लेता हूं।"
उन्होंने कहा, "मैं बदजुबानी नहीं करता। यह विरासत मुझे अपने माता-पिता और शिक्षकों से मिली है और यही भारतीयता की पहचान भी है।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "कड़े शब्दों के इस्तेमाल से किसी समस्या का हल नहीं निकलता है बल्कि विवाद ही पैदा होता है।"
उन्होंने कहा, "कौन कमजोर है और कौन मजबूत है, जोर-जोर से बातें करने से यह साबित नहीं होगा।"
आडवाणी को कटघरे में खड़ा करते हुए उन्होंने कहा, "आडवाणी का रिकार्ड क्या रहा है। भाजपा ने संसद नहीं चलने दी। संसद में बहस के दौरान वे भागते रहें और अब आडवाणी मुझसे बहस करना चाहते हैं। मैं उन्हें वैकल्पिक प्रधानमंत्री बनने का मौका नहीं देना चाहता।"
अपने लोकसभा चुनाव न लड़ने के बारे में आडवाणी द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर प्रधानमंत्री ने कहा, "कई ऐसे प्रधानमंत्री हुए हैं जो राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। इंदिरा गांधी से लेकर एच. डी. देवेगौड़ा और आई. के. गुजराल तक राज्यसभा में रहते हुए प्रधानमंत्री बने। आडवाणी को अपनी इच्छा पूरी करने के लिए संविधान में संशोधन करना पड़ेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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