वार्ताकार ने विरोध स्वरूप इलाक़ा छोड़ा

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वार्ताकार ने विरोध स्वरूप इलाक़ा छोड़ा

सूफ़ी मोहम्मद ने दोनों पक्षों के बीच समझौता करवाया था जिसमें चरमपंथी गतिविधियों बंद करने के बदले स्वात में शरिया क़ानून लागू करने पर सहमति हुई थी.

उन्होंने कहा है कि सरकार समझौते को अंतिम रूप देने में विफल रही है. स्वात में कई लोगों ने शरिया क़ानून लागू करने का स्वागत किया था.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसे शांति समझौते का अंत नहीं कहा जा सकता लेकिन मुख्य वार्ताकार के बग़ैर इसे लागू करवाना मुश्किल हो जाएगा.

सूफ़ी मोहम्मद ने मिंगोरा शहर में एक शांति शिविर स्थापित किया हुआ था लेकिन अब उनका कहना है कि वे वहाँ से जा रहे हैं.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कि वो शांति समझौते और शरिया क़ानून लागू करने को अपनी पुष्टि तभी देंगे जब शांति बहाल हो जाएगी.

फ़रवरी में समझौते की घोषणा के बाद से ही इसे लेकर तनाव की स्थिति रही है.

समझौता

स्वात का ज़्यादातर हिस्सा तालेबान के नियंत्रण में है. वहाँ से हज़ारों लोग भाग चुके हैं और सैकड़ों स्कूल नष्ट हो चुके हैं.

शरिया क़ानून पिछले महीने लागू होना शुरु हो गया था और इलाक़े में बहुत लोगों ने इसका स्वागत किया है क्योंकि उन्हें लगता है कि जल्द न्याय पाने की ये कुशल प्रणाली है.

हालांकि कई बार सज़ा देने के विवादित मामले भी सामने आए हैं. एक किशोरी को कोड़े मारे जाने के वीडियो के जाँच के आदेश दिए गए हैं.

इस समझौते को लेकर शुरु से ही अमरीका चिंता जताता रहा है कि ये चरमपंथियों के सामने आत्मसमर्पण होगा.

बुधवार को स्वात से चरमपंथियों ने पास के बुनेर ज़िले पर हमला किया था. इसके बाद भी शांति समझौते को लेकर चिंता जताई जा रही है..इस हमले में पाँच लोग मारे गए थे.

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