मुद्रास्फीति की दर में मामूली गिरावट, 0.26 फीसदी हुई (लीड-1)
मुद्रास्फीति की दर में लगातार आठ सप्ताह तक गिरावट आई थी और गत 14 मार्च को समाप्त सप्ताह के दौरान यह 0.27 फीसदी पर आ गई थी लेकिन उसके बाद के सप्ताह (21 मार्च) में यह बढ़कर 0.31 फीसदी हो गई थी।
मुद्रास्फीति की दर उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी थोक मूल्य पर आधारित होती है। पिछले माह की 21 व 28 तारीख को समाप्त हुए सप्ताहों के बीच सूचकांक में कोई परिवर्तन नहीं हुआ और यह 227.3 (अस्थाई) पर स्थिर रहा।
इस अवधि के दौरान विनिर्मित वस्तुओं के सूचकांक में 0.2 फीसदी की तेजी आई जबकि प्राथमिक वस्तुओं के सूचकांक में 0.3 फीसदी की गिरावट आई।
ईंधन, बिजली, ऊर्जा और स्नेहक के सूचकांक में कोई परिवर्तन नहीं आया और ये पिछले सप्ताह के स्तर 320.9 पर स्थिर रहा।
अर्थशास्त्री पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि देश की अर्थव्यवस्था में अपस्फीति की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अपस्फीति वह स्थिति है जब कीमतों में लगातार गिरावट आने लगती है।
उल्लेखनीय है कि धन की आपूर्ति कम होने और ऋण न दिए जाने तथा लोगों द्वारा खर्च कम करने के कारण अपस्फीति की स्थिति निर्मित होती है। ऐसे में मांग में कमी आने से बेरोजगारी दर बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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