जूता फेंकने की घटना की कड़ी निंदा

वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगदीश टाइटलर को हाल ही में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा क्लीन चिट दिए जाने से नाराज एक सिख पत्रकार ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम पर जूता फेंक कर सनसनी फैला दी। विरोध के इस तरीके की सभी ने निंदा की है।
भाजपा की कांग्रेस को सलाह
भाजपा ने इस घटना की निंदा करते हुए कांग्रेस को सलाह दी है कि वह लोकसभा चुनाव में सिख विरोधी दंगों के कथित आरोपियों जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार को उम्मीदवार न बनाए। भाजपा प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा, "ऐसी कोई घटना जो अमर्यादित हो और ऐसी कोई भाषा जो देश के बुनियादी लोकाचारों के खिलाफ है, भाजपा उसकी निंदा करती है। जो कुछ भी हुआ कांग्रेस को उससे सबक लेनी चाहिए।"
उन्होंने कहा, "देश के सिख व पंजाबी समुदाय के साथ जो व्यवहार हुआ है उससे उनमें नाराजगी है। टाइटलर को क्लीन चिट देने के मामले में कांग्रेस ने जिस प्रकार से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का इस्तेमाल किया है, उससे लोगों का गुस्सा और बढ़ा है।" सिंह ने कहा, "भाजपा उक्त घटना की निंदा करती है न कि पत्रकार की भावना की। लोकतंत्र में मुद्दों को उठाने की नुमति है। विचारों में अंतर जरूर हो सकता है लेकिन जो घटना हुई है उसका स्वागत नहीं किया जा सकता।"
तिरुवनंतपुरम में इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव प्रकाश करात ने कहा कि गुस्से के इजहार का कोई और भी तरीका हो सकता था। उन्होंने कहा, "सिख विरोधी दंगे को लेकर दिल्ली से कांग्रेस के एक उम्मीदवार के खिलाफ जाहिर तौर पर लोगों में गुस्सा है। लेकिन पत्रकार द्वारा अपनी भावनाओं के इजहार के लिए और भी तरीके हैं।"
मीडिया ने भी निंदा की
जरनैल सिंह के कृत्य की निंदा करते हुए दैनिक जागरण समूह ने कहा कि उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। समूह ने एक बयान में कहा, "यह जरनैल सिंह का निजी मामला है और प्रकाशन समूह का इससे कुछ लेना-देना नहीं है और यह संस्थान की परंपरा, संस्कार व संस्कृति के नियमों और प्रावधानों के खिलाफ है।"
एडिटर्स गिल्ड के केएस सच्चिदानंद मूर्ति ने मंगलवार को कहा कि रिपोर्टिग के लिए बाहर जाने वाले पत्रकारों को पहली सलाह यह दी जानी चाहिए कि वे भावनाओं में न बहें और निष्पक्ष रिपोर्टिग करें। मूर्ति ने कहा, "हम संवाददाताओं को सलाह देते हैं कि वे भावनाओं में न बहें और संवाददाता सम्मेलनों की मर्यादा को भंग न करें। सार्वजनिक बैठकों में मारपीट एक अलग मामला है, लेकिन एक पत्रकार के रूप में हमारी एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। पत्रकारों को अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए।"
समाचार पत्र डीएनए की राजनीतिक संपादक आरती जेरथ ने कहा कि पत्रकार जरनैल सिंह की कार्रवाई अप्रत्याशित थी। जेरथ ने आईएएनएस से कहा, "पेशेवर स्तर पर जब आप कहीं किसी कार्यक्रम की रिपोर्टिग के लिए जाएं तो वहां आपको अपनी भावनाओं को निकाल कर बाहर फेंक देना चाहिए।"
डेक्कन क्रॉनिकल की स्थानीय संपादक नीना गोपाल ने कहा, "मैं नहीं समझती कि यह घटना कार्यक्रमों की रिपोर्टिग में मीडिया की आजादी पर अंकुश लगा देगी। मेरा मतलब यह कि यह घटना मीडिया की गलत तस्वीर प्रस्तुत करेगी। एक पत्रकार के रूप में हमें सम्मान के साथ देखा जाता है और यह घटना उस सम्मान को कम कर सकती है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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