'सपा की कल्याण से दोस्ती तकलीफ़ पहुँची'

बीबीसी के साथ एक ख़ास बातचीत में उन्होंने कहा कि लोग 30 अक्तूबर 1990 और 6 दिसंबर 1992 के इतिहास को भूल नहीं पाएँगे. जहाँ 30 अक्तूबर 1990 को मुलायम सिंह यादव हीरो थे तो वहीं छह दिसंबर 1992 को भारत के तात्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहा राव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह हीरो थे.
उन्होंने कहा कि देश का मुस्लिम और सेक्युलर समाज छह दिसंबर को कलंक दिवस के रूप में मनाता है. आज भी छह दिसंबर को संसद ठीक से चल नहीं पाती है.
सपा का सिपाही
वह शख़्श जिसने यह कहा था कि मुझे एक हज़ार बार बाबरी मस्जिद गिरानी पड़ी तो गिराऊँगा. जिसने यह कहा हो कि एक के बदले पाँच मुसलमान मारे तो दंगे नहीं हुए.जिसने यह कहा हो कि मुझे गर्व है कि मैंने हिंदुत्व के माथे पर लगा कलंक मिटाया है, ज़ाहिर है इससे हर इंसान के दिल में तकलीफ़ होती होगी.
उनका कहना था, "मैं भी एक इंसान और मुसलमान हूँ. जब मेरे दिल को इतनी तकलीफ़ होती है जो सपा का मज़बूत सिपाही है, जो उसका बेहतर भविष्य चाहता हो और उसी से जुड़ा हुआ हो और जुड़ा रहेगा तो आम आदमी को इससे कितनी तकलीफ़ होती होगी. "
सपा छोड़ने के सवाल पर आज़म ख़ान ने कहा, "मेरी तो कोशिश यह है कि मैं अपने घर को जिस तरफ जाते हुए देख रहे हैं उधर जाने से अपनी पूरी ताक़त से रोकूँ."
इस विवाद के समाधान के सवाल पर उन्होंने कहा कि कल्याण सिंह मसले में कई रास्ते हो सकते थे. बीच का भी कोई रास्ता हो सकता था. मेरी नेता जी (मुलायम सिंह यादव) से बात हुई है लेकिन उसे मैं अभी सार्वजनिक नहीं करूँगा.
मेरी तो कोशिश यह है कि मैं अपने घर को जिस तरफ जाते हुए देख रहे हैं उधर जाने से अपनी पूरी ताक़त से रोकूँ आज़म ख़ान, सपा नेता
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उनका मानना है कि सपा कल्याण सिंह के मामले में पाने कम और खोने ज़्यादा जा रही है. इसलिए इसे राजनीतिक रूप से समझदारी भरा फ़ैसला नहीं कह सकते हैं.
जब उनसे पूछा गया कि आपने साक्षी महाराज के पार्टी में शामिल होने और कल्याण सिंह के बेटे के साथ सरकार में मंत्री रहने के दौरान इतना विरोध क्यों नहीं किया तो उन्होंने कहा कि मेरे विरोध के कारण ही साक्षी महाराज को पार्टी से निकाला गया था.
साक्षी का विरोध
जिस समय मैं कल्याण सिंह के बेटे साथ मंत्रिमंडल में था तो हमेशा नेता जी के दाएँ-बाएँ खड़ा रहता था, इससे मुसलमानों को लगता था कि मैं उन्हें ठगने नहीं दूँगा.
रामुपर से जयाप्रदा की उम्मीदवारी को आज़म ख़ान ने स्थानीय मामला बताते हुए कहा कि यह बहुत छोटी बात है लेकिन कुछ लोग कुछ लोग भ्रम फैला कर असली बात से ध्यान हटा रहे हैं.
अमर सिंह के उस आरोप जिसमें आज़म ख़ान रामपुर में कांग्रेस का प्रचार करने का आरोप लगाया था के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि किसी ख़ास उम्मीदवार में इतनी दिलचस्पी, मेरे ख़िलाफ़ अपशब्दों का प्रयोग अमर सिंह के लिए शोभा नहीं देता है. इसका लोगों में संदेश भी अच्छा नहीं जा रहा है.
लोकसभा चुनाव में सपा के प्रचार के सवाल पर आज़म ख़ान ने कहा कि पार्टी ने ही कह दिया है कि मुझे प्रचार में उतारा नहीं जाएगा. रामपुर की इकाई ही भंग कर दी गई है. इसके अलावा भी जो किया जा सकता था किया गया है, ऐसे में मै क्या कर सकता हूँ.
कांग्रेस या बसपा में शामिल होने से आज़म ख़ान ने इनकार किया.


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