चुनाव के कारण रुकी शादियां

चुनाव के कारण बारातियों को ले जाने के लिए बसें नहीं मिल पा रही हैं। अगर मिल भी रहीं हैं तो बस मालिकों द्वारा मनमाना किराया वसूला जा रहा है। ऐसे में वर पक्ष वालों को दिक्कत हो गई है कि वे दुल्हन के दरवाजे पर कैसे पहुंचें। ज्योतिषाचार्य पंडित महादेव मिश्रा का कहना है कि मांगलिक कार्यों का शुभ मुहूर्त बिहार में चार अप्रैल से ही प्रारंभ हो गया है। अप्रैल माह में 14, 16, 17, 22, 27, 28 तथा 29 को विवाह के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त हैं।
वाहनों की कमी
इस दिन कई जोड़े परिणय सूत्र में भी बंधने को तैयार हैं। परंतु अप्रैल माह में 16, 23 तथा 30 अप्रैल को लोकसभा चुनाव होने हैं। चुनाव के दस दिन पूर्व से ही मतदानकर्मियों तथा सुरक्षाकर्मियों को लाने और ले जाने के लिए अधिकारियों द्वारा वाहनों की घर-पकड़ प्रारंभ कर दी जाती है, जिससे सड़कों पर वाहनों की कमी हो जाती है।
औरंगाबाद निवासी रामाधार प्रसाद का कहना है कि उनके लड़के श्याम की शादी सारन के कन्हैया प्रसाद की पुत्री से 14 अप्रैल को होनी निश्चित थी। इसके लिए तैयारियां भी काफी हद तक पूरी हो गईं थीं परंतु वाहनों के नहीं मिलने के कारण इस तिथि को बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब फिर से तिथि तय की जाएगी।
ऐसा नहीं कि यह समस्या एक ही व्यक्ति की है। मुजफ्फरपुर निवासी शंभु सिंह के पुत्र कमल की शादी अब ठंड के मौसम में होगी। शंभु सिंह का कहना है कि ललन की बारात पटना जानी थी परंतु बस मालिकों द्वारा मनमाना किराया मांगने के कारण वह 16 अप्रैल को बारात नहीं ले जाएंगे। सीतामढ़ी के लखन पांडेय की बेटी सरिता के विवाह की तिथि भी चुनाव के कारण बदल दी गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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