छत्तीसगढ़ में कड़ी टक्कर दे रही हैं महिला उम्मीदवार
राज्य की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीन महिलाओं को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने दो महिलाओं को मैदान में उतारा है।
राजनीतिक विश्लेषक विनोद सिंह ने आईएएनएस को बताया, "भाजपा और कांग्रेस की इन पांचों महिला उम्मीदवारों ने अपने पुरुष प्रतिद्वंद्वियों की नींद हराम कर दी है। मैं पक्का नहीं कह सकता कि वे चुनाव जीत ही जाएंगी, लेकिन निश्चितरूप से उनके जीतने की संभावनाएं हैं।"
भाजपा ने अपने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भांजी करुणा शुक्ला को कोरबा से, सरोज पांडे को दुर्ग से और कमला पाटले को अनुसूचित जाति के लिए अरक्षित राज्य की इकलौती सीट जांजगीर-चांपा से उम्मीदवार बनाया है।
यहीं पर कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पत्नी रेनु जोगी को भाजपा के तेजतर्रार उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप सिंह जूदेव के खिलाफ विलासपुर से मैदान में उतारा है। इसके अलावा कांग्रेस ने अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कांकेर सीट से भाजपा के वर्तमान सांसद सोहन पोटाई के खिलाफ फुलो देवी नेताम को टिकट दिया है।
पोटाई ने कहा, "मैं वर्ष 1998 से ही कांकेर सीट पर चुनाव जीतता आ रहा हूं और अब लगातार चौथी बार जीतने की तैयारी में हूं। लेकिन इस बार की लड़ाई पिछले तीन चुनावों की बनिस्बत थोड़ी चुनौतीपूर्ण दिखाई देती है।"
कांग्रेस महासचिव रमेश वार्लयानी ने कहा, "पहली बार दोनों दलों की महिला प्रत्याशी अपने पुरुष प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर दे रहीं हैं। मैं भाजपा उम्मीदवारों के बारे में तो कुछ नहीं कह सकता लेकिन कांग्रेस की दोनों महिला उम्मीदवार बिलासपुर और कांकेर में अपने प्रतिद्वंद्वियों पर भारी हैं।"
भाजपा की उम्मीदवार करुणा शुक्ला का अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस राज्य इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष चरणदास महंत के साथ सीधी टक्कर है। जबकि सरोज पांडे का कांग्रेस के प्रदीप चौबे और वर्तमान सांसद ताराचंद साहू के साथ त्रिकोणीय मुकाबला है। साहू को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पिछले दिनों भाजपा से निलंबित कर दिया गया था।
शुक्ला कहती हैं, "इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि मैं चुनाव जीत रही हूं, लेकिन मैं अपने प्रतिद्वंद्वी को कभी कम भी नहीं आंकती।"
पांडे कहती हैं, "संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के कार्यकाल में व्याप्त महंगाई ने मेरे रास्ते को आसान कर दिया है। मुझे सहज जीत की उम्मीद है।"
राजनीतिक विश्लेषक अनिल विभाकर कहते हैं, "पांचों महिला उम्मीदवारों के लोकसभा में पहुंचने की पूरी संभावना है। फिलहाल वे अपने प्रतिद्वंद्वियों पर भारी हैं लेकिन मतदान के अंतिम 48 घंटों में इस बारे में कुछ स्पष्ट पता चल पाएगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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