पाकिस्तानी सैनिकों पर 1971 के युद्ध अपराधों का मुकदमा चलाना चाहता है बांग्लादेश
बांग्लादेश को संयुक्त राष्ट्र के चार विशेषज्ञों की सहायता मिली है और वह फरवरी में संसद के पारित विशेष प्रस्ताव के अनुरूप आगे बढ़ रहा है। एक उच्च स्तरीय जांच संस्था की घोषणा करने की संभावना है।
मुक्ति युद्ध के मामलों के राज्य मंत्री ए.बी.ताजुल इस्लाम ने मंगलवार को 'न्यू एज' समाचार से कहा, "हम मामले को अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय में ले जाएंगे और मानवता के विरूद्ध अपराधों के लिए पाकिस्तान की आक्रमणकारी सेना के सदस्यों के खिलाफ मुकदमा चलाना चाहेंगे।"
मंत्री ने कहा कि अत्याचारों से संबंधित अपराधी अब बांग्लादेश में नहीं है इसलिए देश को अब उनको न्याय के कटघरे में लाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।
भारतीय सेना के नेतृत्व वाली संयुक्त कमांड के सामने आत्मसमर्पण करने वाले पाकिस्तानी सेना के करीब 80,000 अधिकारियों और जवानों तथा 13,000 नागरिकों को पाकिस्तान को सौंप दिया गया था।
इन सभी गिरफ्तार लोगों पर युद्ध अपराधों के लिए मुकदमा आरंभ नहीं हो सका क्योंकि भारत ने एक तरफा ढंग से इन सभी पर मुकदमा न चलाने को कहा था। तीन जुलाई 1972 को भारत व पाकिस्तान के बीच हुए शिमला समझौते के अनुसार इनको रिहा कर दिया गया। बांग्लादेश उस समझौते का हिस्सा नहीं था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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