विकास से आज भी कोसों दूर है मुजफ्फरपुर
मुजफ्फरपुर, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। जिस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व 27 वर्षो तक जार्ज फर्नाडीस और कैप्टन जयनारायण प्रसाद निषाद जैसे दिग्गज नेताओं ने किया हो वह आज भी पिछड़े जिलों की श्रेणी में आता है। यहां की साक्षरता दर मात्र 48 फीसदी है और लगभग 55 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन बसर करने को मजबूर है।
स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस की फांसी के गवाह बने मुजफ्फरपुर में 7,157 हेक्टेयर भूमि में लीची के बगान हैं। शाही लीची के लिए प्रसिद्घ मुजफ्फरपुर में लीची विकास योजना भी अब तक विफल ही रही है। वादे तो कई हुए लीची प्रोसेसिंग प्लांट लगाने से लेकर प्रीकूलिंग वैन तक के लेकिन अमल आज तक नहीं हुआ।
राजनीतिक विश्लेषक रविन्द्र सिंह का कहना है कि आगामी चुनाव में मुजफ्फरपुर में विकास का मुद्दा गौण रहेगा क्योंकि कोई भी उम्मीदवार विकास के मुद्दे को मतदाताओं से दूर रखना चाहेगा। वे कहते हैं कि इस बार यहां केन्द्र सरकार की उपलब्धि, नीतीश सरकार का विकास तथा जार्ज के प्रति लोगों की सहानुभूति के मुद्दे पर चुनाव लड़ा जाएगा। हालांकि उनका मानना है कि जार्ज को कार्यकर्ताओं की कमी जरूर खलेगी।
मुजफ्फरपुर संसदीय क्षेत्र में गायघाट, औराई, बोचहां, सकरा, कुढ़नी तथा मुजफ्फरपुर विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इसमें औराई विधानसभा पूर्व में सीतामढ़ी क्षेत्र में आता था जिसे नए परिसीमन में मुजफ्फरपुर में जोड़ दिया गया है तथा मीनापुर विधानसभा को अलग कर दिया गया है। इस संसदीय क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 20 लाख है।
वर्ष 2004 में हुए चुनाव में जार्ज फर्नाडीस ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भगवान लाल साहनी को 9693 मतों से हराया था।
मुजफ्फरपुर से वर्ष 1977, 1980, 1989, 1991 तथा 2004 में चुनाव जीत चुके जार्ज को जदयू ने इस बार टिकट नहीं दिया जिससे नाराज जार्ज इस दफा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं।
जार्ज की जगह जदयू ने वर्ष 1996 से 2004 तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले कैप्टन जयनारायण निषाद को तथा लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने राजद से लोजपा में आए भगवान लाल साहनी को चुनाव मैदान में उतार कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
कांग्रेस ने विनीता विजय को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने समीर कुमार को तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने जितेन्द्र यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है।
मुजफ्फरपुर के बड़े लीची उत्पादकों में से एक राजकुमार केड़िया बताते हैं कि चुनाव के समय नेताओं के वादे जरूर होते हैं परंतु वादे पूरे नहीं होते हैं। उनका मानना है कि नेताओं ने यहां लीची प्रोसेसिंग प्लांट लगाने, प्रीकूलिंग वैन बनाने के वादे किये थे, परंतु कुछ नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि नेताओं की बेरूखी के चलते लीची बगानों का क्षेत्रफल तथा उत्पादन लगातार धीरे-धीरे घटता ही जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरपुर संसदीय क्षेत्र में पड़ने वाले छह विधानसभा क्षेत्रों में तीन जहां जदयू के कब्जे में है वहीं दो पर राजद का कब्जा है और एक निर्दलीय के पास है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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