युवा अधिकारी की आत्महत्या से मायावती सरकार को झटका

लखनऊ, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कथित घूस की मांग से परेशान होकर उत्तर प्रदेश के एक युवा अधिकारी द्वारा आत्महत्या करने का मामला चुनावी मुद्दा बनने की आशंका है। इस घटना से जनवरी में एक सरकारी इंजीनियर की पीटकर की गई हत्या की याद ताजा हो गई है।

उत्तर प्रदेश प्रादेशिक सहकारी संघ (यूपीपीसीएफ) के 26 वर्षीय सहायक प्रबंधक सैयद गयास अहमद ने शनिवार को अपने गृह नगर इलाहाबाद में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली।

मध्य प्रदेश से सटे महोबा जनपद में तैनात अहमद छुट्टी पर थे। उन्होंने अपने पीछे सुसाइड नोट में वरिष्ठ अधिकारियों की प्रताड़ना का विवरण दिया है।

अहमद की आत्महत्या की खबर फैलते ही मुख्यमंत्री मायावती ने जल्दबाजी में यूपीपीसीएफ के प्रबंध निदेशक (एमडी), अतिरिक्त प्रबंध निदेशक (एएमडी) और महाप्रबंधक (प्रशासन) (जीएम) को निलंबित करने का आदेश दिया।

अहमद के एक बचपन के मित्र ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर आईएएनएस को बताया कि गयास हर महीने 5,000 रुपये देने के अपने वरिष्ठ अधिकारियों के 'आदेश' के बारे में अक्सर चर्चा करता था।

उसने कहा कि परिवार पर किसी को भी घटना के बारे में नहीं बताने का भारी दबाव है। उनको चेतावनी दी गई है कि यदि उन्होंने मुद्दे को उठाया तो किसी भी आश्रित को सरकारी नियुक्ति नहीं दी जाएगी।

सुसाइड नोट में अहमद ने लिखा, "नियुक्ति के बाद से ही एमडी, एएमडी और जीएम पैसे के लिए लगातार प्रताड़ित करते रहे और उसकी चरित्र पंजिका को खराब करने की भी धमकी देते रहे। मैंने अपने सहयोगियों से एकत्र करके 48,000 रुपये इन अधिकारियों को घूस के रूप में दिए भी।"

नोट के लिखा गया था, "पिछले कुछ दिनों से प्रधान कार्यालय से लगातार 100,000 रुपये की मांग की जा रही है। इसका इंतजाम करने में विफल होने से मैं आत्महत्या करने को विवश हूं।"

शनिवार को सुसाइड नोट की प्रतियां बंटवाने वाली समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव के पहले बहुजन समाज पार्टी की सरकार अधिकारियों से जबरन वसूली कर रही है।

सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने मायावती पर अप्रत्यक्ष रूप से जबरन वसूली में शामिल होने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसी कार्यरत न्यायाधीश से एक उच्च स्तरीय न्यायिक जांच से ही सत्य का पता चल सकता है।

कांग्रेस और भाजपा के भी इस मामले को एक चुनावी मुद्दा बनाने की दौड़ में शामिल होने के बाद राज्य सरकार ने सोमवार रात को मंडलीय आयुक्त को मामले की उच्च स्तरीय जांच करने का आदेश दिया।

मामले पर रक्षात्मक रवैया अपनाए सहकारिता मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला आते ही जबरन वसूली के आरोपी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। इसका स्वागत किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की नीति भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करने की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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