'गृह मंत्री पर जूता फेंकना सिख समुदाय की भावनाओं की अभिव्यक्ति'
एक कॉलेज के छात्र अर्शदीप सिंह ने कहा, "मैं समझता हूं कि यह एक बहुत ही साहस भरा और सख्त कदम था। यह सिर्फ किसी एक व्यक्ति के गुस्से और हताशा को प्रकट नहीं करता, बल्कि 1984 के सिख विरोधी दंगे के मामले में आए फैसले पर पूरे सिख समुदाय की भावनाओं को अभिव्यक्ति प्रदान करता है।"
एक युवा सिख ग्रंथी बलविंदर सिंह ने कहा कि सिख समुदाय का धर्य जवाब दे चुका है।
उन्होंने कहा, "हमारे धर्य की और अधिक परीक्षा लेने की कोशिश न की जाए। हमने 25 वर्षो तक न्याय का इंतजार किया है। यदि सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती तो हम इस मुद्दे के साथ अपने स्तर से निपटेंगे।"
एक अन्य छात्र तनवीर सिंह संधू ने कहा, "इस घटना ने हमें हिला कर रख दिया है। पत्रकार द्वारा अपनाया गया तरीका बहुत अपरिपक्व था, लेकिन वह जो संदेश देना चाहता था वह बिल्कुल ठीक था। कम से कम सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि आम जनता नींद में नहीं है। वह जानती है कि अपने विचारों को कैसे अभिव्यक्ति देनी है।"
एक बीमा कंपनी में सहायक प्रबंधक सागर सिंह सचदेव ने कहा कि जरनैल सिंह का जूता फेंकना इस मुद्दे पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने का एक तरीका था।
एक व्यापारी मंजीत सिंह ने कहा कि यह कदम बहरी सरकार के कान तक अपनी आपत्ति पहुंचाने के लिए जरूरी था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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