'पत्रकार का जूता फेंकना गैरपेशेवर हरकत'
एडिटर्स गिल्ड के के.एस. सच्चिदानंद मूर्ति ने मंगलवार को कहा कि रिपोर्टिग के लिए बाहर जाने वाले पत्रकारों को पहली सलाह यह दी जानी चाहिए कि वे भावनाओं में न बहें और निष्पक्ष रिपोर्टिग करें।
मूर्ति ने कहा, "हम संवाददाताओं को सलाह देते हैं कि वे भावनाओं में न बहें और संवाददाता सम्मेलनों की मर्यादा को भंग न करें। सार्वजनिक बैठकों में मारपीट एक अलग मामला है, लेकिन एक पत्रकार के रूप में हमारी एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। पत्रकारों को अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए।"
समाचार पत्र डीएनए की राजनीतिक संपादक आरती जेरथ ने कहा कि पत्रकार जरनैल सिंह की कार्रवाई अप्रत्याशित थी।
जेरथ ने आईएएनएस से कहा, "पेशेवर स्तर पर जब आप कहीं किसी कार्यक्रम की रिपोर्टिग के लिए जाएं तो वहां आपको अपनी भावनाओं को निकाल कर बाहर फेंक देना चाहिए।"
डेक्कन क्रॉनिकल की स्थानीय संपादक नीना गोपाल ने कहा, "मैं नहीं समझती कि यह घटना कार्यक्रमों की रिपोर्टिग में मीडिया की आजादी पर अंकुश लगा देगी। मेरा मतलब यह कि यह घटना मीडिया की गलत तस्वीर प्रस्तुत करेगी। एक पत्रकार के रूप में हमें सम्मान के साथ देखा जाता है और यह घटना उस सम्मान को कम कर सकती है।"
ज्ञात हो कि जरनैल सिंह ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर को लेकर हुई हल्की बहस के बाद गृह मंत्री पी.चिदंबरम पर जूता फेंक दिया। केद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 1984 के सिख दंगों के मामले में टाइटलर को हाल में बरी कर दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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