पाकिस्तानी किशोरी ने कोड़े की मार से किया इंकार (लीड-1)
बताया गया है कि एक तालिबान मौलाना ने उस लड़की को इसलिए कोड़े लगाया, क्योंकि वह जिस व्यक्ति के साथ अपने घर से बाहर निकली थी, वह उसका शौहर नहीं था।
एक दंडाधिकारी के सामने लड़की द्वारा दिए गए बयान को महान्यायवादी लातिफ खोसा ने सर्वोच्च न्यायालय में पेश किया।
स्थानीय टेलीविजन चैनल 'जियो टीवी' के अनुसार उस बयान में कहा गया है, "किशोरी ने कोड़े बरसाने की घटना से इंकार किया है।" जबकि कोड़े बरसाने के दृश्यों का कई टीवी चैनलों ने प्रसारण किया है।
सोमवार को आयोजित सुनवाई में पीड़िता अदालत में उपस्थित नहीं थी।
मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की आठ सदस्यीय खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान गृह सचिव और उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत (एनडब्ल्यूएफपी) के पुलिस महानिरीक्षक अदालत में मौजूद थे।
प्रधान न्यायाधीश चौधरी ने कहा कि इस घटना की जांच की जाएगी।
पिछले दिनों ब्रिटिश समाचार पत्र 'द गार्जियन' ने खबर दी थी कि तालिबानी आतंकवादियों ने 17 वर्षीया किशोरी पर 34 कोड़े बरसाए थे।
दो मिनट के वीडियो में कोड़े खाते समय बुर्काधारी लड़की को चीखते हुए दिखाया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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