राबड़ी देवी के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में अवमानना का मामला (लीड-1)
याचिका दायर करने वाले पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आशुतोष रंजन ने अपनी याचिका में कहा है कि छपरा में राबड़ी देवी द्वारा यह कहे जाने कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने न्यायालय को भी पॉकेट में रख लिया है, से न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंची है। उन्होंने न्यायालय से उक्त भाषण की सीडी चुनाव आयोग से मंगवाकर उसकी जांच करने और सही पाए जाने पर स्वत: न्यायालय की अवमानना के तहत कार्रवाई करने का निवेदन किया है।
इधर, राबड़ी देवी द्वारा छपरा में सार्वजनिक सभा में मुख्यमंत्री और ललन सिंह पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी के बाद सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव जहां नरम दिखे वहीं मुख्यमंत्री तथा ललन सिंह ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है।
राबड़ी देवी के पति व रेल मंत्री मामले को ठंडा करने के लिए मजाकिया लहजे में सोमवार को पटना में पत्रकारों से सिर्फ इतना कहा, "नीतीश मेरे छोटे भाई हैं।"
उधर, नीतीश कुमार ने इस मामले को न्यायालय में ले जाने की बात फिर से दोहराई है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों के बाद किसी को माफ नहीं किया जा सकता। पटना में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक सभ्य समाज में ऐसे बयान देने के बाद किसी को भी सार्वजनिक जीवन में रहने का कोई हक नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मामले में आगे कारवाई करने पर विचार कर रही है।
मुंगेर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए ललन सिंह ने कहा कि ऐसे लोगों को मतदाता कैसे वोट दे सकते हैं, जो सार्वजनिक मंच पर भी गाली-गलौच की भाषा में बोलते हैं। उन्होंने कहा कि यह जद (यू)के लिए चुनावी मुद्दा बन गया है।
उल्लेखनीय है कि शनिवार को राबड़ी देवी ने छपरा में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार और ललन सिंह पर बेहद व्यक्तिगत टिप्पणी की थी। जदयू के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को राज्य निर्वाचन आयोग में इसकी शिकायत की थी। इसके बाद रविवार देर रात राबड़ी देवी के खिलाफ सारण जिले के भेल्दी थाना में सार्वजनिक मंच से अपशब्द कहने के आरोप में एक मामला दर्ज किया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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