'विद्रोहियों का आख़िरी गढ़ ध्वस्त'

सेना की ये कारर्वाई देश के उत्तर-पूर्व के पूर्वी पुथक्कुदियुरिप्पु में की गई. इस पर तमिल विद्रोहियों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं है. अगर सेना का दावा सही है तो ये उसके लिए बड़ी सफलता है.
विद्रोहियों के आख़िरी ठिकाने को भी लगभग ख़त्म कर दिया गया है. अगर अभी भी विद्रोही बचे हैं तो उन्हें आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए बनाए गए 'सुरक्षा क्षेत्र' से बाहर खदेड़ दिया गया है श्रीलंका सेना
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श्रीलंका सेना के प्रवक्ता बिर्गेडियर उदय नानयक्कारा ने बीबीसी को बताया कि सेना के साथ मुठभेड़ में पिछले कुछ दिनों में विद्रोहियों के पांच कमांडरों सहित चार सौ से ज़्यादा विद्रोही मारे जा चुके हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने युद्ध से प्रभावित क्षेत्र में फँसे हज़ारों लोगों के भविष्य को लेकर बार बार चिंता वयक्त की है.
अपने एक वक्तव्य में संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने नागरिकों, ख़ासकर बच्चों की ज़बरन भर्ती पर अफ़सोस ज़ाहिर किया था.
युद्ध से प्रभावित क्षेत्र में फँसे आम नागरिकों को वहाँ से जाने देने के लिए बान की मून ने लिट्टे विद्रोहियों पर दबाव डाला था.
इसी बीच विद्रोहियों के हमलों से प्रभावित कैंपों में रह रहे लगभग 60,000 शरणार्थियों के मदद देने के लिए विशेष दूत श्रीलंका की यात्रा कर रहे हैं.
कैलिन कैंपों में शरण लेने वाले लोगों की स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं और इसके लिए उन्होंने श्रीलंका सरकार के अधिकारियों के साथ मिलकर नए तरीक़े ढूंढने की बात कही है जिससे यहां रहने वाले नागिरको को बेहतर सुविधाएँ दी जा सकें.
हालांकि इन हमलों के लेकर विद्रोहि गुट से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं आई है. सरकारी कार्रवाई को भी एकतरफ़ा प्रमाणित नहीं किया जा सकता क्योंकि युद्ध क्षेत्र में पत्रकारो को भी जाने की इजाज़त नहीं है.


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