'चुनाव बाद नहीं बिखरेगा तीसरा मोर्चा'

माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य येचुरी ने आईएएनएस से एक साक्षात्कार में स्वीकार किया कि पुराने मित्र प्रकाश करात से मतभेदों के बावजूद उनके संबंध विरोधियों जैसे नहीं है।
येचुरी ने कहा कि तमिलनाडु में एआईएडीएमके और कर्नाटक में जनता दल-सेक्युलर अपने वोट बैंक के कारण वामदलों के साथ आए हैं। इसलिए वे चुनाव के बाद कांग्रेस या भाजपा के साथ नहीं जाएंगे।
दबाव में टूटा बीजद-भाजपा गठबंधन
येचुरी ने बीजू जनता दल (बीजद) का उदाहरण देते हुए कहा कि जन दबाव के कारण ही बीजद ने भाजपा के साथ अपना 11 वर्ष पुराना गठबंधन तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि पार्टियों ने अपने पुराने अनुभव से सीख ली है और वह चुनाव के बाद कांग्रेस या भाजपा के साथ नहीं जाएंगी। येचुरी ने स्वीकार किया कि पार्टी महासचिव प्रकाश करात के साथ उनके मतभेद हैं जो चुनाव के बाद कांग्रेस को समर्थन देने के खिलाफ हैं।
येचुरी ने कहा कि उनकी पार्टी हाई कमांड पार्टी नहीं है, इसलिए यह स्वाभाविक है। हमारी पार्टी में आतंरिक लोकतंत्र है। परंतु एक बार सामूहिक निर्णय लेने के बाद ही वह लागू होता है।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने के बारे में तीसरे मोर्चे को किसी समस्या के बारे में पूछे जाने पर येचुरी ने कहा कि उनको किसी से कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सभी निर्णय चुनाव के बाद लिए जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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