वाम दलों के सहयोग से संप्रग बना सकता है अगली सरकार : प्रणब (लीड-1)
वाम दलों और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने कहा,"मैं ज्योतिषी नहीं हूं। मैं अनुमान नहीं लगा सकता कि क्या होने वाला है। राजनीति में सब कुछ संभव है।"
मुखर्जी ने कहा कि कांग्रेस ने कभी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से चुनाव पूर्व कोई समझौता नहीं किया लेकिन अन्य छोटी पार्टियों से चुनाव पूर्व समझौता कर चुकी है।
यह पूछे जाने पर कि क्या तीसरे मोर्चे के बारे में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की बातों से वे सहमत हैं तो इस पर मुखर्जी ने कहा कि तीसरा मोर्चा राष्ट्रीय स्तर पर कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाएगा।
बकौल मुखर्जी, "मेरा मानना है कि काफी कम सीटें होने, राष्ट्रीय स्तर पर मौजूदगी काफी कम होने और प्रधानमंत्री पद का कोई उम्मीदवार नहीं होने से मोर्चा राष्ट्रीय स्तर पर कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाएगा।"
संप्रग के बिखरने संबंधी खबरों के बारे में उन्होंने कहा, "बेवजह मीडिया में संप्रग के बिखराव और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की एकजुटता को लेकर बहस छिड़ी हुई है। संप्रग कोई राजनीतिक दल नहीं है। वह एक गठबंधन है जो पूरी तरह एकजुट है।"
हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद), लोकजनशक्ति पार्टी (लोजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ सीटों के तालमेल को लेकर कांग्रेस की बात नहीं बनी लेकिन साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि ये सभी राजनीतिक दल संप्रग के साथ हैं। उन्होंने कहा कि खुद इन राजनीतिक दलों ने कहा है कि वे संप्रग का हिस्सा हैं।
भाजपा के घोषणा पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, "सभ्यता बचाने के नाम पर भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में राम मंदिर, राम सेतु, गंगा, धारा 370 और गौ वंश की बात की है। इन्हें छोड़ दिया जाए तो भाजपा ने कांग्रेस के घोषणा पत्र से बाकी चीजें उठा ली हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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