घोषणापत्र से भाजपा के सहयोगी असहमत

भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए जारी घोषणापत्र में राम मंदिर और धारा 370 जैसे मुद्दो को उठाया है लेकिन उसके मुख्य सहयोगी इससे सहमत नहीं हैं.
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में भाजपा के सबसे बड़े सहयोगी जनता दल युनाईटेड (जदयू) ने कहा है कि जब एनडीए का घोषणापत्र जारी होगा तो ज़रुरी नहीं कि भाजपा के इन मुद्दों को उसमें शामिल किया जाए.
पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जदयू के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ख़ास कर राम मंदिर के मसले पर कहा, "ये मुद्दा भाजपा के तरीकों से हल नहीं होगा. या तो हम मिल कर इसका समाधान निकालेंगे या कोर्ट से कोई हल निकल सकता है." उन्होंने भाजपा के घोषणापत्र को पार्टी का आंतरिक मामला बताते हुए उस पर ज़्यादा टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
इस बीच सहयोगी दलों को साथ रखने के इरादे से घोषणापत्र जारी करने के कुछ देर बाद ही भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने कह दिया कि एनडीए का घोषणापत्र अलग से 16 अप्रैल से पहले जारी होगा.
उनका कहना था कि भाजपा अपना घोषणापत्र सभी सहयोगियों को देगी और उनकी सहमति वाले बिंदुओं के साथ 16 अप्रैल के पहले एनडीए का एजेंडा आ जाएगा.
भाजपा ने ग्यारह साल बाद जारी अपने घोषणापत्र में राम मंदिर निर्माण, समान नागरिक संहिता और धारा 370 को ख़त्म करने की बात फिर दोहराई है.
आडवाणी ने इन तीनों मुद्दों को राष्ट्रहित से जुड़ा बताया. धारा 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष दर्जे पर उन्होंने कहा, "एक ही देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान का विरोध हमारी पार्टी शुरु से करती आई है और हम इस पर कायम हैं."


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