अफ़ग़ानिस्तान नैटो के एजेंडे में शीर्ष पर

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शुक्रवार को अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के संसाधनों का बेहतर उपयोग करने को कहा था.
उन्होंने कहा था कि अल क़ायदा अमरीका से अधिक यूरोप के लिए ख़तरा बनता जा रहा है. ओबामा चाहते हैं कि यूरोपीय देश अफ़ग़ानिस्तान में और सैनिक और पैसे भेजने का वादा करें.
इस बीच नैटो के नेताओं में संगठन के नए महासचिव के नाम पर अभी सहमति नहीं बन पाई है.
इस बात की अधिक संभावना है कि जर्मनी में शुक्रवार को शिखर सम्मेलन की शुरुआत में होने वाले भोज पर नैटो के नए प्रमुख के नाम पर सहमति बन जाए.
यूरोप के कुछ बड़े देश इस पद के लिए जाप डे हूप सीफ़र के स्थान पर डेनमार्क के प्रधानमंत्री एंडर्स फ़ॉग रासमुसीन के नाम का समर्थन कर रहे हैं.
सीफ़र का कार्यकाल इस साल जुलाई में ख़त्म हो रहा है.
इस बात की ज़्यादा संभावना है कि अल क़ायदा अमरीका की तुलना में यूरोप में बड़ा हमला करे बराक ओबामा, अमरीकी राष्ट्रपति
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लेकिन 2005 में डेनमार्क के एक अख़बार में पैगंबर मोहम्मद पर छपे कार्टून पर दिए गए रासमुसीन के बयान को आधार बनाकर तुर्की उनका विरोध कर रहा है.
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अख़बार पर प्रतिबंध न लगाने के रासमुसीन के फ़ैसले से बहुत से मुसलमान नाराज़ थे.
स्ट्रासबर्ग में मौजूद बीबीसी के कूटनीतिक संवाददाता जोनाथन मार्कस का मानना है कि यह असहमति एक शर्मनाक शुरुआत है.
लेकिन इसके नेताओं को भरोसा है कि इसक विवाद की छाया बैठक पर नहीं पड़ेगी.
शिखर सम्मेलन का आयोजन नैटो की 60वीं सालगिरह मनाने के लिए जर्मनी और फ़्रांस ने मिलकर किया है.
असली चुनौती
नैटो को हज़ारों मील दूर अफ़ग़ानिस्तान में असली चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
अभी पिछले महीने ही बराक ओबामा ने अफ़ग़ानिस्तान में संघर्ष के लिए एक नई रणनीति बनाई है.
शुक्रवार को स्ट्रासबर्ग में उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में अल क़यादा के ख़िलाफ़ जारी लड़ाई में यूरोपीय नेताओं से एकजुट होने की अपील की.
उन्होंने कहा, "इस बात की ज़्यादा संभावना है कि अल क़ायदा निकटता की वजह से अमरीका की तुलना में यूरोप में बड़ा हमला करे."
स्ट्रासबर्ग में विरोध-प्रदर्शन की धमकी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. पिछले दो दिनों में दर्जन भर लोग गिरफ़्तार किए गए हैं.


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