विश्व बैंक से मदद चाहता है भारत

यहां आए कुछ सरकारी अधिकारियों ने बताया कि इस सहायता की अधिकांश राशि का इस्तेमाल सरकारी बैंकों को अगले दो या तीन वर्षो तक पूंजी उपलब्ध कराने में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त शेष राशि का इस्तेमाल बुनियादी ढांचे को वित्तीय मदद पहुंचाने वाली कंपनियों और पॉवर ग्रिड कारपोरेशन की मदद के लिए किया जाएगा।
भारत को आमतौर पर विश्व बैंक से प्रति वर्ष तीन अरब डॉलर की राशि मदद के रूप में मिलती है। इस राशि में से लगभग आधी राशि रियायती दर पर उपलब्ध कराई जाती है। गुरुवार को समाप्त हुई जी-20 शिखर बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आश्वासन दिया गया था कि भारत जैसे विकासशील देशों को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक जैसे शीर्ष वित्तीय संगठनों में अधिक मताधिकार दिया जाएगा।
बैठक के दौरान जी-20 देशों के नेताओं ने दुनिया को मंदी से उबारने के लिए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं को 11 खरब डॉलर का कोष उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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