'अल क़ायदा के ख़िलाफ़ एकजुट हो यूरोप'

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यूरोपीय देशों से अपील की है कि चरमपंथी संगठन अल क़ायदा के ख़िलाफ़ उन्हें एकजुट होकर सामने आना चाहिए. नैटो समूह के स्ट्रासबर्ग में हो रहे सम्मेलन के दौरान ओबामा ने यूरोपीय देशों से कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में अल क़ायदा के ख़िलाफ़ लड़ी जा रही लड़ाई के समर्थन में एकसाथ आगे आएं.
ओबामा ने चेताया कि अगर अगले चरमपंथी हमले की स्थिति पैदा होती है कि इसकी आशंका अमरीका से ज़्यादा यूरोप के किसी देश में है. इस सम्मेलन में बोलते हुए ओबामा यूरोपीय संघ के देशों को यह ध्यान दिलाने से भी नहीं चूके कि अफ़ग़ानिस्तान में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ चल रही लड़ाई में वे भी हिस्सेदार थे.
यानी संकेत साथ था कि अगर आप हिस्सेदार रहे हैं तो आपको उसी प्रतिबद्धता के साथ सामने आना चाहिए और लड़ाई का समर्थन करना चाहिए. नैटो के इस सम्मेलन का आयोजन नैटो के 60 वर्ष पूरे होने के मौके पर किया गया है. इस सम्मेलन की मेज़बानी जर्मनी और फ्रांस मिलकर कर रहे हैं.
संख्या नहीं, इस्तेमाल पर ध्यान
अमरीकी राष्ट्रपति ने एक और महत्वपूर्ण बात यह कही है कि यह ज़रूरी नहीं है कि अफ़ग़ानिस्तान में संसाधनों को और बढ़ाया जाए बल्कि इसपर ज़ोर देना होगा कि कैसे मौजूदा संसाधनों का बेहतर और अधिक प्रभावी इस्तेमाल हो सके.
उधर नैटो सचिव ने एक और चिंता को जाहिर करते हुए कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में मौजूदा स्थितियाँ जिस तरह की बन रही हैं उसमें और सैनिकों को भेजने की बात से सदस्य देश सहमत नहीं हो सकते हैं.
दरअसल, यह ताज़ी चिंता अफ़ग़ानिस्तान में एक नए क़ानून के लागू होने को लेकर है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वह महिलाओं के अधिकारों के ख़िलाफ़ है. अफ़ग़ानिस्तान में यह प्रस्तावित नया क़ानून दुनियाभर में चर्चा का और विवाद का विषय बना हुआ है.
इस नए क़ानून के तहत शादीशुदा ज़िंदगी में महिला के साथ पति का बलात्कार करना अपराध नहीं माना जाएगा. हालांकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गार्डन ब्राउन ने इस आशंका के उलट अस्थाई तौर पर अफ़ग़ानिस्तान में अधिक सैनिकों को अभियान के लिए भेजने की बात कही है.


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