जरदारी पर स्वात शांति समझौता रद्द करने का दबाव

उधर मामले को दूसरा रूप देने की नई कोशिश करते हुए तालिबान ने कहा कि किशोरी अपने पति के साथ न रहकर ससुर के साथ रहती थी।

समाचार पत्र 'द न्यूज' ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी और सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश इफ्तिखार मुहम्मद चौधरी स्वात पर सरकार का नियंत्रण दोबारा स्थापित करने के लिए इस घटना के इस्तेमाल का हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

जहां गिलानी ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं, वहीं चौधरी ने मामले की जांच के लिए गठित न्यायाधीशों की आठ सदस्यीय समिति के सामने पीड़िता को पेश करने का आदेश दिया है।

सूत्र के हवाले से अखबार ने कहा कि उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत (एनडब्ल्यूएफपी) की सरकार और तालिबान ने 16 फरवरी को जब शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे तो जरदारी अच्छी तरह जानते थे कि दुनिया इस विवादास्पद समझौते को स्वीकार नहीं करेगी। परंतु राजनीतिक दलों, ताकतवर धार्मिक संगठनों और सबसे बढ़कर मीडिया के दबाव में उन्होंने इसे मंजूरी दी।

आतंकवादियों से संघर्ष से परेशान सेना ने भी इस समझौते का समर्थन किया, जिसने जरदारी के सामने कोई विकल्प नहीं छोड़ा। समाचार पत्र के अनुसार 17 वर्षीय किशोरी की सार्वजनिक रूप से कोड़ों से पिटाई ने मंजूरी के लिए उनके हस्ताक्षर का इंतजार कर रहे समझौते पर जरदारी के हस्ताक्षर को निश्चित रूप से कठिन बना दिया है।

मामले को नया रूप देने का प्रयास करते हुए तालिबान प्रवक्ता मुस्लिम खान ने कहा कि किशोरी को इसलिए दंडित किया गया क्योंकि पति के तलाक देने के बाद वह अपने ससुर के साथ रह रही थी।

खान ने यह भी दावा किया कि घटना नौ महीने पुरानी है और एनडब्ल्यूएफपी के साथ शांति समझौते के काफी पहले की है।

उधर एनडब्ल्यूएफपी सरकार ने वीडियो जारी करने को 16 फरवरी के शांति समझौते को कमजोर करने की साजिश करार दिया है। सूचना मंत्री इफ्तिखार चौधरी ने कहा कि घटना प्रांतीय सरकार के तालिबान के साथ समझौते के पहले की है और शांति समझौते का विरोध करने वाले एक स्वंयसेवी संगठन ने इसे जारी किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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