कंपनियों और राजनीतिक दलों के चुनावी आर्थिक रिश्तों का मानक बनाने की कोशिश
नई दिल्ली, 4 अप्रैल(आईएएनएस)। अब जब अधिकांश बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने अपने चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिए हैं, संचार विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव इन घोषणा पत्रों का विश्लेषण करने में व्यस्त है। वह अपनी पसंद की पार्टी का चयन करने के लिए नहीं, बल्कि कारपोरेट जगत और राजनीति पार्टियों के चुनावी आर्थिक रिश्ते को लेकर फार्मूला विकसित करने में लगे हैं।
उनका उद्देश्य राजनीतिक पार्टियों को यह सुझाव देना है कि किस पार्टी को किस हद तक चंदा दिया जाए और किसे चंदा देना उचित है। 44 वर्षीय सचदेव यहां एक थिंक टैंक द इमैजिन इंस्टीट्यूट के संचालक हैं।
उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "कंपनियों के लिए यह तय करना महत्वपूर्ण है कि किस पार्टी के जीतने की संभावना है और किस पार्टी को किस हद तक चंदा दिया जाए। हम इस मामले में कारपोरेट जगत की मदद करना चाहते हैं। हम राजनीतिक चंदे का एक उपयुक्त माडल विकसित करने में लगे हैं।"
सचदेव और उनकी टीम के लोग इन दिनों पार्टियोंे के एजेंडे और वादों का विश्लेषण करने में जुटे हैं। उन्होंने कहा, "कपंनियों के लिए यह जानना जरूरी है कि निजीकरण, विदेशी निवेश, श्रम सुधार, भूमंडलीकरण जैसे अहम मसलों पर दलों का रुख क्या है। हम विश्लेषण के आधार कई सुझाव देंगे। मसलन, जिन इलाकों में कंपनियों के प्रतिष्ठान व कार्यालय हैं, वहां की प्रमुख पार्टियों को ज्यादा तवज्जो मिलनी चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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