पार्टियों से जमाते इस्लामी की माँग

Gujrat Muslims

मुस्लिम संगठन जमाते इस्लामी ने सात माँगों पर आधारित एक चार्टर तैयार किया है. संगठन उस पार्टी को समर्थन देगा जो इन माँगों पर अमल करेगी.इनमें से आधी माँगे सभी भारतवासियों से संबंधित हैं जबकि आधी माँगों का संबंध देश के मुस्लिम अल्पसंख्यकों से है.

जमाते इस्लामी की आंध्र प्रदेश में राजनीतिक दलों के सामने रखी जाने वाली माँगों में सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता में आने से रोकना, हर परिवार के कम से कम एक व्यक्ति को साल भर रोज़ग़ार की गारंटी और किसानों और दूसरे ग़रीब कामग़ारों को बिना किसी ब्याज के ऋण उपलब्ध कराना शामिल है.

इसके अलावा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने और प्रशासन को भ्रष्टाचार और अपराधीकरण से मुक्त कराने की माँग भी रखी गई है. जमाते इस्लामी ने अपनी मांगों के समर्थन में पूरे राज्य से क़रीब एक करोड़ हस्ताक्षर जमा किए हैं और अब वो इस बारे में कांग्रेस और तेलुगूदेशम से बातचीत कर रही है.

जमात की आँध्र प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष एसएम मलिक का कहना था, "यह सिर्फ़ जमाते इस्लामी का घोषणापत्र नहीं है, हमारी कोशिश है कि यह घोषणापत्र अवाम में जाए और अवाम इसको क़बूल करे. हम दूसरी पार्टियों से बात करेंगे कि हमारे पास लोग हैं, अवाम है अगर वो हमारे घोषणापत्र को पसंद करते हैं तो उन्हें इसे क़बूल कर लेना चाहिए."

समस्याओं पर ज़ोर

उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि राजनीतिक दल लिखकर तहरीर दें कि वे इस घोषणापत्र पर अमल करने की कोशिश करेंगे. जमाते इस्लामी इस पर गौर करेगा कि इस घोषणापत्र पर अमल हो रहा है या नहीं."

जमाते इस्लामी का कहना है... इस समय हम चाहे सियासत में पूरा दख़ल न दें लेकिन सियासत पर असर ज़रूर डालना चाहेंगे. इस तरह हम चाहेंगे कि मुल्क़ के मामलों और समस्याओं का हल हो जाए. हमने सिर्फ़ मुसलमानों की समस्याओं को नहीं लिया है बल्कि हम चाहते हैं कि इस मुल्क़ की समस्याओं का हल निकले एसएम मलिक

इस समय हम चाहे सियासत में पूरा दख़ल न दें लेकिन सियासत पर असर ज़रूर डालना चाहेंगे. इस तरह हम चाहेंगे कि मुल्क़ के मामलों और समस्याओं का हल हो जाए. हमने सिर्फ़ मुसलमानों की समस्याओं को नहीं लिया है बल्कि हम चाहते हैं कि इस मुल्क़ की समस्याओं का हल निकले

जमात के अलावा युनाइटेड मुस्लिम फ़ोरम ने भी अपना एक चुनावी घोषणापत्र जारी किया है जिसका पूरा ज़ोर मुस्लिम समुदाय की समस्याओं पर है.

जमात ने सुप्रीम कोर्ट की सिफ़ारिशों के अनुसार पुलिस में मुसलमानों को 25 प्रतिशत जगह देने और रोज़गार में दस प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित रंगनाथ मिश्रा कमीशन को लागू करने, सांप्रदायिक दंगों के विरुद्ध कानून बनाने जैसी माँगें की है.

जबकि यूनाइटेड मुस्लिम फ़ोरम की माँग है कि आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई के नाम पर निर्दोष मुस्लिम युवाओं को निशाना बनाने वाले अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए और जो युवा अदालत में निर्दोष साबित हों उन्हें मुआवज़ा दिया जाए और मीडिया को मुसलमानों को बदनाम करने वाली रिपोर्टों के प्रचार से रोका जाए.दोनों ही संगठनों ने मुसलमानों की चल-अचल संपत्ति की सुरक्षा पर भी ज़ोर दिया है.

बेरोज़ग़ारी

जमात की इन माँगों पर हैदराबाद के मुहम्मद वहीद कहते हैं, "मुसलमानों के बच्चों को नौकरी चाहिए क्योंकि मुसलमानों में बेरोज़ग़ारी बहुत हैं. लोन मिलने चाहिए, बच्चों को पढ़ाई के लिए सहूलियतें मिलनी चाहिए. हर आनेवाली हुकूमत मुसलमानों को आस बंधाती है लेकिन बाद में सब कुछ भूल जाती है."

आम मुसलमान की उम्मीद मुसलमानों की बहुत सी समस्याएँ हैं जिनमें पहली समस्या बेरोज़ग़ारी है. इसके अलावा बच्चों को तालीम में स्कॉलरशिप मिलना चाहिए. पुलिस भी मुसलमानों पर बहुत ज़ुल्म कर रही है और बेक़सूर मुसलमानों के बच्चों को मुजरिम बना कर जेल में डाल देती है फज़ीलुद्दीन

मुसलमानों की बहुत सी समस्याएँ हैं जिनमें पहली समस्या बेरोज़ग़ारी है. इसके अलावा बच्चों को तालीम में स्कॉलरशिप मिलना चाहिए. पुलिस भी मुसलमानों पर बहुत ज़ुल्म कर रही है और बेक़सूर मुसलमानों के बच्चों को मुजरिम बना कर जेल में डाल देती है

कॉलेज में पढ़ाई कर रहे फज़ीलुद्दीन का कहना है, "मुसलमानों की बहुत सी समस्याएँ हैं जिनमें पहली समस्या बेरोज़ग़ारी है. इसके अलावा बच्चों को तालीम में स्कॉलरशिप मिलना चाहिए. पुलिस भी मुसलमानों पर बहुत ज़ुल्म कर रही है और बेक़सूर मुसलमानों के बच्चों को मुजरिम बना कर जेल में डाल देती है."

जमाते इस्लामी ने अपने समर्थन के लिए लिखित समझौते की जो शर्तें रखी हैं उन्हें कोई राजनीतिक दल स्वीकार करता है या नहीं, यह अभी देखना बाक़ी है लेकिन जमात का कहना है कि वो राजनीति पर बाहर से दबाव डालने का प्रयास करती रहेगी.

एसएम मलिक कहते हैं, "इस समय हम चाहे सियासत में पूरा दख़ल न दें लेकिन सियासत पर असर ज़रूर डालना चाहेंगे. इस तरह हम चाहेंगे कि मुल्क़ के मामलों और समस्याओं का हल हो जाए. हमने सिर्फ़ मुसलमानों की समस्याओं को नहीं लिया है बल्कि हम चाहते हैं कि इस मुल्क़ की समस्याओं का हल निकले."

उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि जो पार्टी हमारी मदद चाहती हो वह हमारे सात बिंदुओं को क़बूल करे और उसके ज़रिए से कुछ समस्याएं हल हों." यह बात बिलकुल स्पष्ट है कि आंध्र प्रदेश के मुसलमान समुदाय में राजनीतिक चेतना और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की आवश्यकता का आभास हर चुनाव के साथ बढ़ता जा रहा है.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+