'जी-20 सम्मेलन एक ऐतिहासिक पहल'

उन्होंने कहा कि दुनिया को आर्थिक संकट से उबारने की दिशा में यह सम्मेलन एक ऐतिहासिक पहल साबित होगा और आशा जताई कि जी-20 देश दुनियाभर से मंदी को खत्म करने और विकास की ओर बढ़ने में मदद करेंगे.
हालांकि सम्मेलन के बाद इसकी समीक्षा कर रहे विशेषज्ञों का मानना है कि सम्मेलन इसलिए भी याद किया जाएगा क्योंकि इस सम्मेलन से साफ़ हो गया है कि वित्तीय शक्ति अब एशिया और विकासशील देशों के पास जाती नज़र आ रही है.
गुरुवार को जी-20 सम्मेलन में हिस्सा लेने आए विश्व नेताओं ने आर्थिक संकट से निपटने के लिए करीब 10 खरब डॉलर की राशि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और दूसरी संस्थाओं को देने की घोषणा की.
जी-20 में हिस्सा लेने के लिए विश्व भर से नेता लंदन में इकट्ठा हुए थे.
अहम घोषणाएँ
आर्थिक संकट से जूझ रहे देशों की मदद के लिए आईएमएफ़ को 750 अरब डॉलर और मिलेंगे. विश्व में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए 250 अरब डॉलर की राशि रखी गई है.
जी-20 की ओर से गॉर्डन ब्राउन ने इन क़दमों की घोषणा की: बैंकरों के वेतन और बोनस पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी हेज फ़ंड और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की भी कड़ी निगरानी होगी विश्व के ग़रीब देशों को 50 अरब डॉलर की मदद मिलेगी वित्तीय स्थायित्व बोर्ड का गठन किया जाएगा जो आईएमएफ़ के साथ काम करेगा ताकि विभिन्न देशों में तालमेल हो सके.
समापन भाषण देते हुए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने कहा, "आर्थिक संकट से लड़ने के लिए सब लोग एक साथ आगे आए हैं. ऐसे हालात दोबारा पैदा न हों इसके लिए एक योजना पर सहमति हुई है."
उन्होंने ये भी कहा कि पूर्व में बैंकिंग प्रणाली को लेकर बरता गया गुप्त रवैया ख़त्म होना चाहिए और जो लोग पारदर्शिता नहीं अपनाएँगे उनके खिलाफ़ क़दम उठाए जाएँगे.
ब्राउन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में भी सुधार किया जाएगा ताकि उन्हें और कार्यकुशल बनाया जा सके.
आईएमएफ़ को फ़ायदा
जी-20 सम्मेलन से सबसे ज़्यादा फ़ायदा आईएमएफ़ को हुआ है. अन्य देशों की मदद के लिए उसके बाद 500 अरब डॉलर की अतिरिक्त धनराशि होगी.
गॉर्डन ब्राउन ने कहा है कि विश्व अर्थव्यवस्था को तुरंत दुरुस्त करने का कोई तरीका नहीं है लेकिन सबने ये वचनबद्धता दिखाई है कि उनसे हो सकेगा वो किया जाएगा.
वहीं फ़्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा है कि जी-20 सम्मेलन से इससे ज़्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती थी. इससे पहले आशंका जताई जा रही थी कि फ़्रांस-जर्मनी के ब्रिटेन और अमरीका के साथ मतभेद हैं.
जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने भी जी-सम्मेन से निकले नतीजों पर ख़ुशी जताई है.
जी-20 उन देशों का गुट है जो विश्व की 85 फ़ीसदी अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं.
जी-20 में विश्व के सात बड़े औद्योगिक देश- ब्रिटेन, कनाडा, फ़्रांस, इटली, जापान, जर्मनी और अमरीका शामिल हैं.
इसके अलावा भारत, चीन, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, इंडोनेशिया, मेक्सिको, रूस, सउदी अरब, दक्षिण अफ़्रीका, दक्षिण कोरिया और तुर्की भी हैं. यूरोपीय संघ 20वें सदस्य के तौर पर शामिल है.
जी-20 की अध्यक्षता वर्तमान में ब्रिटेन के पास है. इसकी आखिरी बैठक पिछले साल वाशिंटगन में हुई थी.
इसका गठन 1999 में एशियाई वित्तीय संकट के दौरान हुआ था ताकि अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर बातचीत की जा सके.


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