'बंदी अमरीकी कोर्ट में अपील कर सकते हैं'

अमरीका के एक जज ने अपने फ़ैसले में कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना के हाथों बंदी बनाए गए लोग अमरीकी अदालतों में अपील कर सकते हैं.
न्यायाधीश जॉन बेट्स ने अमरीकी सरकार के उस प्रस्ताव को ख़ारिज़ कर दिया जिसमें कहा गया था कि अफ़ग़ानिस्तान के बागराम एयर बेस क़ैदी शिविर में रखे गए तीन बंदियों को ये अधिकार नहीं है कि वे अपनी रिहाई के लिए अपील कर सकें.
पिछले साल अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने ग्वांतानामो बे में रखे गए क़ैदियों को अपील करने की इजाज़त दी थी लेकिन न्याय विभाग ने कहा था कि बागराम के क़ैदियों को इस तरह के अधिकार नहीं हैं. न्यायाधीश जॉन बेट्स ने अपने फ़ैसले में कहा कि दोनों ही शिविरों के क़ैदियों का मामला एक जैसा है.
अमरीकी सेना ने तीन संदिग्ध लोगों को अफ़ग़ानिस्तान के बाहर गिरफ़्तार किया था और ये पिछले छह वर्षों से बागराम क़ैदी शिविर में रह रहे हैं.
ताज़ा फ़ैसले के बाद तीनों क़ैदी अपनी रिहाई के लिए अमरीकी अदालत की शरण ले सकते हैं. तीनों क़ैदियों में फदी अल मक़ालेह और अमीन अल बकरी यमन से हैं जबकि रेदा अल नजर ट्यूनीशिया के नागरिक हैं.
वशिंगटन स्थित बीबीसी संवाददाता एडम ब्रुक्स का कहना है कि ये फ़ैसला ओबामा प्रशासन के लिए बड़ा झटका है. क़ैदियों की पैरवी करने वाले वकील ने कहा कि ये अमरीकी न्यायिक प्रणाली के लिए एक महान दिन है.


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