'पंजाब के बच्चों में यूरेनियम मात्रा अधिक'

फ़रीदकोट शहर की एक चैरिटी ने बताया है कि करीब 149 बच्चों के बालों के नमूनों का रासायनिक विश्लेषण किया गया था और उनमें विशैली तत्वों की मात्रा काफ़ी ज़्यादा पाई गई.
ये अध्ययन 13 साल से कम उम्र के बच्चों पर किया गया. इन नतीजों से अधिकारी हैरान हैं क्योंकि पंजाब में यूरेनियम के स्रोतों की जानकारी नहीं है.
ये परीक्षण दक्षिण अफ़्रीका के डॉक्टर कैरिन स्मिथ की सलाह पर किए गए थे जो ब्रिटेन की ग़ैर सरकारी संस्था डिफ़ीट ऑटिज़म के साथ मिलकर काम करते हैं.
नमूनों का परीक्षण जर्मनी की एक प्रयोगशाला में किया गया. सभी बच्चे बाबा फ़रीद सेंटर फ़ॉर स्पेशल चिल्ड्रन संस्था में रहते थे. संस्था के प्रमुख प्रिथपाल सिंह ने इन नतीजों पर हैरानी जताई है.
उन्होंने कहा, विशेषज्ञों के मुताबिक करीब 80 फ़ीसदी नमूनों में यूरेनियम की काफ़ी ज़्यादा मात्रा पाई गई है. हमें बताया गया है कि यूरेनियम से संपर्क में आने और जन्मजाम बीमारियों के बीच गहरा संबंध है.
इन अप्रत्याशित नतीजों ने डॉक्टर स्मिथ और उनकी सहयोगी वेरा डिर का ध्यान फ़रीदकोट की ओर खींचा है. इन लोगों ने अब बच्चों से पेशाब के नमूनों इकट्ठा किए हैं ताकि और जाँच की जा सके.
अभी किसी को पता नहीं है कि यूरेनियम का स्रोत क्या है. अभी तक ये परीक्षण केवल फ़रीदकोट के बच्चों का ही किया गया है.
बाबा फ़रीद सेंटर फ़ॉर स्पेशल चिल्ड्रन संस्था के प्रमुख ने कहा है कि नतीजों से ये नहीं कहा जा सकता कि बच्चे रेडियोधर्मी पदार्थों के संपर्क में आए हों.
पंजाब में स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें इस समस्या की जानकारी नहीं है.
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री लक्ष्मी कांत चावला ने कहा है, "ये स्वास्थ्य का मसला नहीं है. हमें नहीं पता कि कितने बच्चों में यूरेनियम की इतनी अधिक मात्रा पाई जा रही है. इस समस्या से निपटना केंद्र सरकार का काम है."


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