पप्पू यादव नहीं लड़ पाएँगे चुनाव

समाचार एजेंसियों के मुताबिक़ पप्पू यादव ने अपनी याचिका में सज़ा को स्थगित रखने की माँग की थी.
हाईकोर्ट के न्यायाधीश शिवा किर्ती सिंह और न्यायाधीश धरनीधर झा की खंडपीठ ने 26 मार्च को इस दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.
पीठ ने कहा कि पप्पू यादव को हत्या के एक मामले में सज़ा मिली हुई है इसलिए क़ानूनन उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती है.
पप्पू की ओर से पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील आरके आनंद और मजीद मेनन ने कहा कहा था कि इस मामले में सज़ा राजन तिवारी के बयान के आधार पर हुई है जो बार-बार अपना बयान बदलते हैं और उन्हें सह अभियुक्त बनाया गया है जो क़ानून के मुताबिक़ सही नहीं है.
पप्पू यादव मामले की तुलना नवजोत सिंह सिद्धू के मामले से नहीं की जा सकती है सरकारी वकील
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आरके आनंद ने क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का उदाहरण देते हुए कहा अगर उनके मुवक्किल की सज़ा पर रोक लगाकर उन्हें चुनाव लड़ने की इजाज़त नहीं दी गई तो पप्पू यादव को राजनीतिक नुक़सान उठाना पड़ेगा. उसकी भरपाई मुश्किल होगी.
उनकी इस दलील का विरोध करते हुए सीबीआई के वकील विपिन कुमार सिन्हा और मामला दर्ज काने वाले के वकील विंध्याचल सिंह ने कहा कि इस मामले की सिद्धू के मामले से तुलना नहीं की जा सकती है.
सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 14 अगस्त 2008 को अजीत सरकार हत्याकांड में पप्पू यादव, राजन तिवारी और अनिल यादव को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.
फ़ैसले के ख़िलाफ़ पप्पू यादव ने पटना हाईकोर्ट में अपील की थी. वहाँ से उन्हें इस साल जनवरी में ज़मानत मिल गई थी.
सीपीएम विधायक अजित सरकार और पप्पू यादव के बीच किसानों के मुद्दे पर तीखे मतभेद थे जिसके बाद सरकार को 14 जून 1998 को पूर्णिया शहर में गोली मार दी गई थी.


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