इस बार के नाटो सम्मेलन का खास कूटनीतिक महत्व होगा

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार इस बैठक में नई वैश्विक चुनौतियों, नए खतरों, पुराने दुश्मन राष्ट्रों के साथ रिश्ते में बदलाव जैसे मसलों पर गहन विमर्श होगा। यह बैठक इसलिए भी नायाब होगी कि इसका आयोजन दो मुल्कों के दो शहरों में 3 से 4 अप्रैल तक होने जा रहा है। फ्रांस के स्ट्रासबर्ग और जर्मनी के केल शहर को इसकी मेजबान मिली है। दो शहरों को संयुक्त मेजबानी सौंपे जाने का फैसला भी नाटो के इतिहास में एक अप्रत्याशित है।

इसी सम्मेलन में संगठन के नए महासचिव के नाम की घोषणा होगी। फ्रांस के एक अधिकारी ने कहा कि इस सम्मेलन में अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव का संकेत मिल सकता है। उन्होंने कहा, "ओबामा सामूहिक फैसले में विश्वास करने वाले शख्स हैं। वह बुश की तरह एकतरफा फैसला लेने से परहेज करेंगे। वह चाहेंगे कि इराकी इतिहास का पन्ना उलटा जाए और कुछ नई शुरुआत हो।"

ओबामा अमेरिका के पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी रूस के साथ रिश्तों में सुधार की पहल भी करेंगे। फ्रांस के एक और अधिकारी ने डीपीए से बातचीत करते हुए कहा, "रूस को हम विरोधी नहीं, भागीदार मानते हैं। रूस और नाटो के बीच कूटनीतिक टकराव खत्म होना जरूरी है।" अफगानिस्तान में नाटो सैनिकों की संख्या बढ़ाए जाने की बजाए अफगानी सैनिकों को अधिक से अधिक सक्षम बनाने पर भी चर्चा होगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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