जी-20 की बैठक में 1,000 अरब डॉलर के अतिरिक्त कोष पर सहमति
लंदन, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। जी-20 के नेताओं ने पिछले छह दशकों के सबसे बड़े आर्थिक संकट से निपटने के लिए गुरुवार को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और अन्य वित्तीय संस्थानों में एक हजार करोड़ डॉलर का अतिरिक्त कोष उपलब्ध कराने पर सहमति प्रकट की है।
इसके साथ ही भारत जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक वित्तीय संस्थाओं के संचालन में बड़ी भूमिका देने का वादा भी किया गया है।
शिखर सम्मेलन में शामिल नेता दोहा दौर की वार्ता को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए तेजी से चर्चा तथा व्यापार वित्त की मद में और 250 अरब डॉलर उपलब्ध कराने पर भी सहमत हो गए। ये दोनों भारत की महत्वपूर्ण मांगें थीं।
प्रदर्शनकारियों से बचने के लिए पूर्वी लंदन के टेम्स नदी के किनारे एक्सेल केंद्र में कैमरे के सामने हुई वार्ता के बाद जी-20 शिखर सम्मेलन के अध्यक्ष ब्रिटिश प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन ने कहा, "हम कुछ बड़े और महत्वपूर्ण निष्कर्षो पर पहुंचे हैं।"
कई वित्तीय संस्थाओं के लिए किए गए 1000 अरब डॉलर के वादे में से 250 अरब डॉलर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष को उपलब्ध कराए जाएंगे। जिससे विशेष आहरण अधिकार (स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स,एसडीआर) के द्वारा जरूरतमंद देशों को कम ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराया जा सके।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरुवार को हुए फैसलों के अनुसार जी-20 के देश करीब पांच हजार अरब डॉलर व्यय करेंगे। दुनिया के कुल उत्पादन में इन देशों की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत और जनसंख्या दो-तिहाई है।
जी-20 के नेता 'कर बचत के स्वर्ग' स्थानों के कानूनों को समाप्त करने पर भी राजी हो गए, जहां लोग बैंकिंग गोपनीयता कानून का लाभ उठाकर अपना धन सुरक्षित रखते हैं।
संवाददाता सम्मेलन में ब्राउन ने कहा कि बैंकिंग गोपनीयता को निश्चय ही समाप्त करना होगा। जी-20 के नेता ऐसे देशों और न्यायालयों के पुराने तरीकों को जारी नहीं रखने देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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