ग्वालियर में किताब विक्रय के मामले में निषेधाज्ञा लागू

इसके साथ ही तमाम शिक्षण संस्थाओं के संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किताबों तथा गणवेष का विक्रय कम से कम आठ प्रतिष्ठानों से सुनिश्चित करें। ऐसा न करने वाले संचालकों और प्राचार्यों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

मध्य प्रदेश के तमाम शहरों में चल रही निजी शिक्षण संस्थाओं के लिए किताबों की बिक्री एक बड़ी आय का जरिया है। मनमाने दाम वसूलने और कालाबाजारी के लिए शिक्षण संस्थाएं सिर्फ एक प्रतिष्ठान को किताबों के विक्रय का अधिकार दे देती हैं। इस वजह से जहां अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है वहीं कई बार तनाव की स्थिति भी बन जाती है। इस तरह की शिकायतें जिला प्रशासन तक भी पहुंची है।

ग्वालियर के कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने एक आदेश जारी कर किताब विक्रय के मामले में शहर में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। बुधवार की रात को जारी किए गए आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि सिर्फ एक प्रतिष्ठान से किताबों व गणवेष का विक्रय होने के चलते अशांति फैलने की आशंका बनी रहती है। लिहाजा शिक्षण संस्थाओं को पुस्तक विक्रय कम से कम आठ स्थानों से सुनिश्चित करना होगा। ऐसा न करने वाले शिक्षण संस्थाओं के खिलाफ धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

त्रिपाठी ने गुरुवार को आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा कि एक प्रतिष्ठान से पुस्तक और गणवेष का वितरण होने के कारण अभिभावकों की लंबी कतारें लग हैं साथ ही कानून व्यवस्था की स्थिति के बिगड़ने का खतरा बना रहता है। उन्होंने गुरुवार को तमाम निजी शिक्षण संस्थाओं के संचालकों और प्राचार्यों की बैठक करके निर्देश दे दिए हैं कि पुस्तक व गणवेष वितरण कम से कम आठ प्रतिष्ठानों से किया जाए। इतना ही नहीं पाठ्यक्रम भी मनमर्जी के मुताबिक लागू न किया जाए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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