सर्वोच्च न्यायालय ने वरुण मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया (लीड-1)
प्रधान न्यायाधीश के. जी बालाकृष्णन और न्यायमूर्ति पी. सथशिवम की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करने के बाद मामले की सुनवाई 13 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी। वरुण ने खुद पर रासुका लगाए जाने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में बुधवार को चुनौती दी थी।
पीठ ने ऐसे संकेत भी दिए कि पीलीभीत संसदीय क्षेत्र से नामांकन दाखिल करने के लिए वरूण को कुछ दिन पहले जमानत पर छोड़ा जा सकता है। पीलीभीत संसदीय सीट के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 16 अप्रैल है।
वरुण के वकील और पूर्व अतिरिक्त महान्यायवादी मुकुल रोहतगी की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा वरुण को नामांकन दाखिल करने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।
रोहतगी ने वरुण पर रासुका लगाए जाने के लिए संबंधित नियमों का पालन न करने का राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पीलीभीत के जिलाधिकारी बगैर राज्य सरकार की अनुमति के रासुका के तहत किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकते। यह उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर है।
उन्होंने अपनी दलील में कहा कि वरुण को उस घटना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है जो उनके जेल में जाने के बाद हुई।
वरुण की जान को खतरा होने के संदर्भ में छपी मीडिया रिपोर्टों के हवाले से उन्होंने कहा कि जेल में उनके मुवक्किल की जान को खतरा है इसलिए उन्हें तत्काल रिहा किया जाना चाहिए।
रोहतगी ने वरुण पर रासुका लगाए जाने के कारणों से संबंधित दस्तावेज मुहैया न कराए जाने के लिए मायावती सरकार की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि सिर्फ इसे ही आधार बनाकर रासुका लगाने के राज्य सरकार के फैसले को समाप्त किया जा सकता है।
पीलीभीत क्षेत्र में अपनी गिरफ्तारी से पहले हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप में वरुण पर रासुका लगाया गया था। सुरक्षा कारणों से बुधवार तड़के उन्हें पीलीभीत जेल से एटा जेल ले जाया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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