कई लोगों के लिए पहचान का सबूत भर है वोटर कार्ड

दिल्ली कालेज ऑफ इंजीनियरिंग की छात्रा कनिका वनवारी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "मैंने वोटर कार्ड इसलिए बनवाया ताकि इसे पहचान के सबूत के तौर पर कई जगहों पर पेश कर सकूं। राजनीति में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है और न ही मैं वोट देने के लिए कतार में खड़ी होने जा रही हूं। आज के नेता इतने अच्छे नहीं हैं कि उनके लिए मैं समय बर्बाद करूं।"

छात्रा टीना कहती है, "वरुण गांधी जैसे नेताओं का भाषण सुनने के बाद वोटिंग में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं रह गई है। यह कार्ड इस मामले में ज्यादा उपयोगी है कि इसका इस्तेमाल पहचान के सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है।" बतौर नौकरानी काम करने वाली सरिता देवी का कहना है कि वह वोट देगी या नहीं यह तय नहीं है, पर इस कार्ड के कारण कई कार्य आसान जरूर हो गए हैं।

दिल्ली की मुख्य निर्वाचन अधिकारी सतबीर सिलास बेदी भी मानती हैं कि कई लोगों के लिए इस कार्ड का मतलब पहचान का सबूत भर है। वह कहती हैं, "समस्या यह है कि इस कार्ड से लैस लोगों में से कई वोट देने के लिए बाहर निकलते ही नहीं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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