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अमरीका-ईरान के बीच बातचीत

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अमरीका-ईरान के बीच बातचीत

हिलेरी ने कहा कि ईरान के उप विदेश मंत्री मोहम्मद मेंहदी अख़ूनदज़ादेह और अफ़गानिस्तान में अमरीका के राजदूत रिचर्ड होलब्रूक के बीच बातचीत हुई है.

दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत हेग में अफ़गानिस्तान पर हो रहे एक सम्मेलन के दौरान हुई.

अमरीका ने इस बैठक में ईरान की मौजूदगी का स्वागत किया है.

विशेषज्ञों का कहना है कि अमरीका और ईरान के बीच तनाव में आई कमी की वजह नए राष्ट्रपति ओबामा का बेहतर रवैय्या हो सकता है.

इससे पहले ईरान ने अफ़गानिस्तान में क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने संबंधी अमरीकी योजना का सतर्कता से स्वागत किया था.

किसी भी देश में विदेशी सेना के रहने से स्थिति बेहतर नहीं हुई है और यह तय है कि विदेशी सेनाओं की संख्या बढ़ने से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा अख़ूनदज़ादेह

किसी भी देश में विदेशी सेना के रहने से स्थिति बेहतर नहीं हुई है और यह तय है कि विदेशी सेनाओं की संख्या बढ़ने से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा

सम्मेलन ख़त्म होने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए हिलेरी क्लिंटन ने कहा, '' सम्मेलन के दौरान अफ़गानिस्तान के हमारे विशेष प्रतिनिधि होलब्रुक और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख के बीच अच्छी बातचीत हुई है.''

उन्होंने कहा कि बैठक तय नहीं थी लेकिन होलब्रूक और अख़ूनदज़ादेह इस बात पर सहमत हुए हैं कि वो आने वाले समय में ''संपर्क में रहेंगे''.

हिलेरी का कहना था कि सम्मेलन में ''ईरान की मौज़ूदगी इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में सहयोग मिलेगा.''

अख़ूनदज़ादेह और होलब्रूक के बीच भले ही सौहार्द्रपूर्ण बातचीत हुई हो लेकिन सम्मेलन को संबोधित करते हुए अख़ूनदज़ादेह ने अफ़गानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की संख्या बढ़ाने की आलोचना की और कहा कि अफ़गानिस्तान की सेना के लिए पैसे खर्च होने चाहिए.

उनका कहना था, ‘‘ किसी भी देश में विदेशी सेना के रहने से स्थिति बेहतर नहीं हुई है और यह तय है कि विदेशी सेनाओं की संख्या बढ़ने से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. ’’

ईरान ने अफ़गानिस्तान में सैनिक बढ़ाने की अमरीका की नीति की आलोचना की है

हालांकि उन्होंने साफ़ किया कि अफ़गानिस्तान में मादक पदार्थों की तस्करी रोकने और देश का विकास से जुड़ी परियोजनाओं का ईरान पूर्ण रुप से समर्थन करेगा और उनमें हिस्सा लेगा.

अफ़गानिस्तान का पुनर्निर्माण

अफ़गानिस्तान के मुद्दे पर हेग में एक दिवसीय इस सम्मेलन में 70 देशों के प्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों ने हिस्सा लिया है जिनकी रुचि अफ़गानिस्तान के पुनर्निर्माण में है.

सम्मेलन का आयोजन संयुक्त राष्ट्र ने किया था.

सम्मेलन को संबोधित करते हुए अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा कि अभी तक उनके देश को जो भी मदद मिली है वो बेकार हो गई है.

उनका कहना था कि मदद प्रभावी तरीके से नहीं पहुंचने के कारण लोगों में नाराज़गी व्याप्त है.

इसके बाद हिलेरी ने कहा कि अफ़गानिस्तान को जाने वाली मदद को न केवल प्रभावी तौर से लागू करने की ज़रुरत है बल्कि अफ़गानिस्तान को इस मामले में और जवाबदेह बनना होगा और भ्रष्टाचार पर लगाम कसनी होगी.

उनका कहना था कि अफ़गानिस्तान में लंबे समय तक बने रहना अमरीका के लिए मंहगा सौदा है पर ऐसा करना ज़रुरी है.

हिलेरी ने एक अफ़गानी मुहावरे का हवाला देते हुए कहा कि धैर्य रखना कड़वा हो सकता है लेकिन इसका फल मीठा होता है.

बीबीसी के अंतरराष्ट्रीय विकास संवाददाता डेविड लॉयन का कहना है कि अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की अफ़गानिस्तान पर नई रणनीति का सम्मेलन में व्यापक तौर पर स्वागत हुआ है.

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